
उदित वाणी, जमशेदपुर: भारतीय धातु संस्थान (आईआईएम) जमशेदपुर चैप्टर ने राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल) जमशेदपुर, टाटा स्टील लिमिटेड, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) जमशेदपुर और एकेडमी ऑफ साइंटिफिक एंड इनोवेटिव रिसर्च (एसीएसआईआर) के साथ मिलकर गुरुवार को एनएमएल सभागार में दो दिवसीय बिहाइंड द टीचर डेस्क (बीटीटीडी-2023) संगोष्ठी का शुभारंभ किया.
संगोष्ठी का औपचारिक उद्घाटन मुख्य अतिथि एनआईटी के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने किया. एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रोफेसर गौतम सूत्रधार उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि थे और उन्होंने छात्र प्रतिभागियों को संबोधित किया.
उन्होंने कहा कि धातुकर्म क्षेत्र के अग्रणी संस्थानों द्वारा आयोजित इस तरह के आयोजन निश्चित रूप से युवा दिमाग की रचनात्मकता को बढ़ाएंगे और पारस्परिक कौशल विकसित करने में भी मदद करेंगे. प्रो सूत्रधार ने कहा कि यह मंच छात्रों को अपने विचारों, कौशल को व्यक्त करने के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान करेगा और भविष्य के पाठ्यक्रम के लिए उनकी आधारशिला होगी.
उन्होंने छात्रों को एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, फाउंड्री आधारित तकनीक को पुनर्जीवित करने और विनिर्माण प्रक्रियाओं में आईओटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को शामिल करने पर अपने शोध पर ध्यान केंद्रित करने के लिए भी कहा.
सीखने का मंच-डॉ.श्रीवास्तव
एनएमएल जमशेदपुर के निदेशक डॉ. एके श्रीवास्तव ने मुख्य अतिथि, प्रतिनिधियों और वक्ताओं का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि बीटीटीडी, भारत में स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट छात्रों के लिए एक अनूठा कार्यक्रम है.
सामग्री विज्ञान और धातु विज्ञान के क्षेत्र में काम करने वाले युवा पेशेवरों को समर्पित है, जो उन्हें अपने साथियों के साथ नेटवर्क बनाने और सीखने का मौका देता है. मौके पर सम्मानित अतिथि के रूप में डॉ. एके श्रीवास्तव, निदेशक, एनएमएल, जमशेदपुर, डॉ. संदीप घोष चौधरी, अध्यक्ष, बीटीटीडी प्रोग्राम, डॉ. एएन भगत, अध्यक्ष, आईआईएम जमशेदपुर और डॉ. अम्मासी ए मौजूद थे.
दुनिया के लिए कार्बन उत्सर्जन गंभीर-डॉ.भगत
डॉ. एएन भगत, अध्यक्ष, आईआईएम जमशेदपुर चैप्टर ने गतिविधियों और आईआईएम जमशेदपुर द्वारा आयोजित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी. डॉ. भगत ने स्टील और ऑटोमोटिव क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन की वैश्विक चिंता के बारे में बात की और छात्रोंसे इसे दूर करने के लिए अध्ययन शुरू करने को कहा.
25 इंजीनियरिंग कॉलेजों के 100 छात्र भाग ले रहे हैं-डॉ.संदीप
बीटीटीडी कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. संदीप घोष चौधरी ने बताया कि पिछले वर्षों की तरह इस साल भी देश के विभिन्न हिस्सों से 25 इंजीनियरिंग कॉलेजों और संस्थानों के लगभग 100 छात्र और वक्ता भाग ले रहे हैं.
दो दिन में लगभग 37 तकनीकी पत्र तीन समानांतर सत्रों में प्रस्तुत किया जाएगा. इसके अलावा धातुकर्म प्रश्नोत्तरी सत्र और उद्योग की यात्रा भी होती है. इसमें आईआईटी गांधीनगर, आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी कानपुर, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जमशेदपुर, एनआईटी हमीरपुर, एनआईटी आंध्र प्रदेश, एनआईटी, तिरुचिरापल्ली, एनआईटी त्रिची, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रायपुर, जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता, ओपी जिंदल विश्वविद्यालय, रायगढ़, बिरसा प्रौद्योगिकी संस्थान, सिंदरी, वीर सुरेंद्र साई प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बुर्ला, जेएनटीयू जीवी सीईवी, विजयनगरम, सीआईपीटी कोइलवर, भोजपुर, बिहार, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ झारखंड, गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग, सलेम, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद, वेल्लोर प्रौद्योगिकी संस्थान, वेल्लोर, पीएसजी कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी, कोयम्बटूर, यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के विद्यार्थी भाग ले रहे हैं.
नए विचारों को एक दूसरे के साथ शेयर करते हैं प्रतिभागी
संगोष्ठी का उद्देश्य उद्योग, अनुसंधान एवं विकास केंद्रों और शिक्षाविदों को एक मंच मुहैया कराना था. इससे प्रतिभागियों को अपने नॉलेज को अपडेट करने और धातु विज्ञान और सामग्री प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों, नवीन विचारों और नए विचारों को साझा करने का अवसर मिल रहा है.
वर्ष 2011 में अपनी स्थापना के बाद से सेमिनार बिहाइंड द टीचर डेस्क (बीटीटीडी) भारत की छात्र बिरादरी के बीच सबसे अधिक मांग वाले कार्यक्रमों में से एक बन गया है.


