उदित वाणी, चाईबासा : स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAIL) की गुवा लौह अयस्क खदान में सोमवार सुबह से स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के नेतृत्व में स्थानीय ग्रामीणों और बेरोजगार युवाओं ने खदान में अनिश्चितकालीन चक्का जाम आंदोलन शुरू कर दिया है. इस आंदोलन के कारण खदान क्षेत्र में परिचालन और कामकाज पूरी तरह प्रभावित हो गया है.
500 स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार की मांग
मानकी सुरेश चांपिया और विभिन्न गांवों के मुंडा-मानकी प्रतिनिधियों के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन का मुख्य एजेंडा स्थानीय युवाओं का भविष्य है. प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक 500 स्थानीय बेरोजगार युवकों को रोजगार देने पर लिखित समझौता नहीं होता, तब तक चक्का जाम जारी रहेगा. इसके अलावा, हटाए गए 72 मजदूरों को वापस काम पर रखने और प्रभावित ग्रामीणों को उनके अधिकार देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है.
प्रशासन और सेल प्रबंधन से वार्ता रही बेनतीजा
आंदोलनकारियों का आरोप है कि सेल प्रबंधन केवल आश्वासन दे रहा है, लेकिन धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. जानकारी के अनुसार, 20 अप्रैल 2026 को आश्वासन मिलने पर पूर्व में आंदोलन स्थगित किया गया था. इसके बाद 5 मई 2026 को हुई वार्ता भी बेनतीजा रही. सोमवार को भी प्रबंधन और आंदोलनकारियों के बीच वार्ता का एक दौर चला, लेकिन सहमति नहीं बन पाने के कारण बातचीत विफल रही.
पूर्व मुख्यमंत्रियों का मिला समर्थन
आंदोलन स्थल पर हजारों की संख्या में ग्रामीण और मजदूर डटे हुए हैं. पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने भी आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए कहा कि स्थानीय लोगों की मांगें पूरी तरह जायज हैं. उन्होंने साफ किया कि जब तक रोजगार और अन्य बुनियादी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन थमने वाला नहीं है.
प्रमुख मार्गों को किया गया जाम
आंदोलनकारियों ने खदान के कई प्रमुख मार्गों और प्रवेश द्वारों को जाम कर दिया है, जिससे माल ढुलाई और अन्य गतिविधियां रुक गई हैं. ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से खदान के प्रदूषण और अन्य समस्याओं को झेल रहे हैं, लेकिन जब लाभ और रोजगार की बात आती है, तो उन्हें दरकिनार कर दिया जाता है.


