
उदित वाणी, चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले का सारंडा वन क्षेत्र इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रहा है। यहाँ के ग्रामीण दोहरी मुसीबत का सामना कर रहे हैं। एक तरफ नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण दशकों से भय का साया है, तो दूसरी तरफ अब जंगली हाथियों के बढ़ते उत्पात ने लोगों की रातों की नींद उड़ा दी है।
हेन्देदिरी स्कूल में हाथियों का धावा, मिड-डे मील का राशन चट
ताजा मामला सारंडा के उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय हेन्देदिरी का है। 28-29 अप्रैल की रात दो विशालकाय हाथियों ने स्कूल परिसर में घुसकर भारी तबाही मचाई। हाथियों ने स्कूल के रसोईघर का दरवाजा तोड़ दिया और मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) के लिए रखा चावल, अन्य राशन और सब्जियां खा गए। हाथियों ने न केवल राशन खाया, बल्कि काफी मात्रा में चावल जमीन पर गिराकर बर्बाद भी कर दिया और स्कूल के सामानों को क्षतिग्रस्त कर दिया।
भूखे रहे बच्चे, दहशत में ग्रामीण
हाथियों द्वारा राशन खत्म किए जाने के कारण बुधवार को स्कूल में बच्चों को भोजन नहीं मिल सका। स्कूल पहुंचे बच्चे और शिक्षक डरे-सहमे नजर आए। ग्रामीणों का कहना है कि हाथी अब भी गांव से सटे जंगल में ही मौजूद हैं, जिससे दोबारा हमले का खतरा बना हुआ है। अभिभावकों के अनुसार, नक्सलियों के डर के बाद अब हाथियों के आतंक ने बच्चों को स्कूल भेजने पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों को खदेड़ने और स्कूल को हुए नुकसान के मुआवजे की मांग की है।
पूरा कोल्हान हाथियों के आतंक से त्रस्त
हाथियों का यह कहर सिर्फ पश्चिमी सिंहभूम तक सीमित नहीं है। कोल्हान के तीनों जिले—पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां—हाथियों के आतंक की चपेट में हैं। हाल ही में 23 अप्रैल की रात सरायकेला-खरसावां के चांडिल रेंज में हाथियों ने एक महिला और उसकी 13 साल की बेटी को कुचलकर मार डाला था। वर्तमान में कोल्हान के 200 से अधिक गांवों के लोग हाथियों के डर से रतजगा करने को मजबूर हैं।

