
उदित वाणी, जमशेदपुर : इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड के लंबित दिवालिया कार्यवाही के मामले में एक महत्वपूर्ण विकास हुआ है. नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) की प्रिंसिपल बेंच ने सोमवार को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) द्वारा दायर अपील में 14-15 दिनों की देरी को माफ कर दिया. इससे दशकों से लंबित इस मामले में आगे सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है.
एनसीएलएटी ने कंपनी अपील (इंसॉल्वेंसी) नंबर 224 ऑफ 2026 के साथ आई.ए. नंबर 814 ऑफ 2026 पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया. जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली बेंच ने ईपीएफओ की देरी माफी की अर्जी को स्वीकार कर लिया.रिस्पॉन्डेंट्स की ओर से वकील ने कहा कि देरी 14 दिन की नहीं बल्कि 15 दिन की है, लेकिन ट्रिब्यूनल ने माना कि यह देरी माफी योग्य सीमा के अंदर है और पर्याप्त कारण दिखाया गया है.
ईपीएफओ ने अपनी अर्जी में देरी का कारण सरकारी संस्था की प्रक्रियागत और प्रशासनिक जरूरतें बताईं. इनमें शामिल थे-पैनल वकीलों से कानूनी राय लेने में लगा समय, जमशेदपुर और कोलकाता के क्षेत्रीय कार्यालयों के बीच दस्तावेजों का समन्वय और आंतरिक मंजूरियों की कई परतें.ट्रिब्यूनल ने इन कारणों को कानून के तहत “पर्याप्त कारण” माना और देरी माफ कर दी.
अब मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को मुख्य मुद्दों पर होगी. उल्लेखनीय है इंकैब इंडस्ट्रीज, भारत के केबल विनिर्माण क्षेत्र की एक प्रमुख कंपनी थी, जिसका पूर्वी भारत (खासकर पश्चिम बंगाल और झारखंड) में बड़ा औद्योगिक आधार था. 1990 के अंत में वित्तीय संकट, बढ़ते कर्ज और परिचालन बंद होने के कारण कंपनी पिछले 25 वर्षों से प्रभावी रूप से बंद पड़ी हुई है.
इस दौरान कंपनी की संपत्तियां कई कानूनी, वित्तीय और लेनदार-संबंधी कार्यवाहियों में उलझी रहीं. ईपीएफओ की भागीदारी बकाया, वैधानिक बकायों और कर्मचारी कल्याण दायित्वों की पुरानी चिंताओं को उजागर करती है.
