
उदित वाणी जमशेदपुर : चक्रधरपुर रेल मंडल में ट्रेनों के परिचालन की सुस्त रफ्तार यात्रियों के लिए लगातार मुसीबत बनती जा रही है। सोमवार को टाटानगर स्टेशन पर उस समय यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, जब टाटानगर से विशाखापट्टनम जाने वाली 20815 विशाखापट्टनम एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से करीब पांच घंटे देरी से रवाना हुई।
इस ट्रेन का निर्धारित प्रस्थान समय सुबह 7:25 बजे है, लेकिन यह दोपहर 12:15 बजे के बाद ही टाटानगर स्टेशन से खुल सकी। देरी के कारण स्टेशन परिसर में बड़ी संख्या में यात्री घंटों तक भटकते नजर आए। इनमें खासकर वे छात्र और उनके अभिभावक शामिल थे, जो होली की छुट्टी के बाद पढ़ाई के लिए हॉस्टल लौट रहे थे।
अभिभावकों ने रेलवे प्रशासन के प्रति नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्होंने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुबह की ट्रेन चुनी थी, ताकि वे शाम तक अपने गंतव्य—भुवनेश्वर या विशाखापट्टनम—पहुंच सकें। लेकिन ट्रेन की देरी के कारण अब इनके देर रात करीब 10:30 बजे भुवनेश्वर पहुंचने की संभावना है, जिससे रात में ऑटो या अन्य परिवहन मिलने में कठिनाई और असुरक्षा का डर बना हुआ है।
यात्रियों ने यह भी आरोप लगाया कि स्टेशन पर की जा रही उद्घोषणाओं में स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही थी। हर बार केवल 15-15 मिनट की देरी की घोषणा कर समय आगे बढ़ाया जाता रहा, जिससे यात्री न तो स्टेशन छोड़ पाए और न ही उन्हें वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सकी।
सिर्फ विशाखापट्टनम एक्सप्रेस ही नहीं, बल्कि सोमवार को टाटानगर से गुजरने वाली करीब एक दर्जन ट्रेनें घंटों की देरी से चलीं। सबसे खराब स्थिति इस्पात एक्सप्रेस की रही, जो अपने निर्धारित समय दोपहर 1:45 बजे के बजाय रात 12:26 बजे टाटानगर पहुंची, यानी 10 घंटे 41 मिनट की देरी से।
इसके अलावा इतवारी एक्सप्रेस 5 घंटे 17 मिनट, ओखा-शालीमार साप्ताहिक 5 घंटे 39 मिनट, मुंबई-हावड़ा मेल 4 घंटे 44 मिनट, अजमेर स्पेशल 4 घंटे 16 मिनट, झारग्राम मेमू 3 घंटे 42 मिनट और आजाद हिंद एक्सप्रेस 3 घंटे 40 मिनट देरी से चली। ट्रेनों की इस लेटलतीफी ने होली की छुट्टियों के बाद काम और पढ़ाई पर लौट रहे यात्रियों की पूरी योजना बिगाड़ कर रख दी।

