
उदित वाणी, जमशेदपुर : औद्योगिक नगरी जमशेदपुर को लेकर एक गंभीर खुफिया चेतावनी सामने आने के बाद प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं. इंटरपोल की ओर से भेजी गई रिपोर्ट के बाद जिले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हलचल तेज हो गई है और पूरे तंत्र को अलर्ट मोड पर रखा गया है. एसएसपी से लेकर खुफिया एजेंसियों तक को चौकस रहने और हर गतिविधि पर पैनी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं.
रिपोर्ट सामने आने के बाद जिला पुलिस, इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) और अन्य खुफिया इकाइयों को लगातार निगरानी बढ़ाने के आदेश दिए गए हैं. एसएसपी समेत सभी वरीय अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने, पुराने मामलों की फाइलें खंगालने और संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों पर नजर रखने को कहा गया है. सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार स्तर पर भी एक उच्चस्तरीय बैठक की तैयारी चल रही है, जिसमें आगे की रणनीति और सुरक्षा उपायों पर निर्णय लिया जाएगा.
स्लीपर सेल नेटवर्क का दावा
खुफिया इनपुट में दावा किया गया है कि जमशेदपुर में एक दर्जन से अधिक स्लीपर सेल सक्रिय हैं. बताया गया है कि इनका सीधा या परोक्ष संबंध पाकिस्तान से है और कुछ लोग वहां आतंकी प्रशिक्षण भी ले चुके हैं. रिपोर्ट के अनुसार आजादनगर थाना क्षेत्र के जाकिरनगर रोड नंबर-14 निवासी सैयद मोहम्मद अर्शियान इस नेटवर्क को लीड कर रहा है. आतंकी गतिविधियों से जुड़े होने के बाद से वह पिछले सात–आठ वर्षों से फरार बताया जा रहा है. उसकी तलाश में एनआईए और एटीएस की टीमें कई बार जमशेदपुर आ चुकी हैं, लेकिन अब तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है.
पुराने मामलों ने बढ़ाई चिंता
जमशेदपुर का नाम पहले भी आतंकी नेटवर्क से जुड़े मामलों में सामने आ चुका है. 18 जनवरी 2016 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हरियाणा के मेवात से अलकायदा से जुड़े आतंकी अब्दुल शमी को गिरफ्तार किया था. जांच में सामने आया था कि वह ओडिशा के कटक से गिरफ्तार अब्दुल रहमान उर्फ कटकी के संपर्क में था. कटकी को ओडिशा और झारखंड में नेटवर्क तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी. पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ था कि अब्दुल शमी जनवरी 2014 में दुबई के रास्ते पाकिस्तान गया था, जहां उसने हथियारों का प्रशिक्षण लिया.
क्यों संवेदनशील है जमशेदपुर
टाटा स्टील और टाटा मोटर्स जैसी बड़ी औद्योगिक इकाइयों की मौजूदगी के कारण जमशेदपुर राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र है. ऐसे प्रतिष्ठान आतंकी संगठनों के लिए हाई इम्पैक्ट टारगेट माने जाते हैं. टाटानगर रेलवे जंक्शन, राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों का मजबूत नेटवर्क शहर को लॉजिस्टिक रूप से भी बेहद अहम बनाता है. ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार से सीधी कनेक्टिविटी संदिग्ध गतिविधियों को छिपाने में सहायक हो सकती है.
इंटरपोल की रिपोर्ट ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि औद्योगिक और लॉजिस्टिक रूप से मजबूत शहर आतंकी संगठनों की नजर में संवेदनशील रहते हैं. ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती किसी भी संभावित खतरे को समय रहते पहचान कर उसे निष्क्रिय करना है. सतर्कता, तकनीकी निगरानी और आपसी समन्वय ही जमशेदपुर की सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल साबित हो सकते हैं.
