
उदित वाणी, जमशेदपुर : उद्योगपति केरव गांधी के अपहरण कांड में पुलिस जांच के साथ-साथ सनसनीखेज खुलासों का सिलसिला लगातार जारी है. अब तक की जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि केरव गांधी का अपहरण किसी एकमात्र घटना तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक बड़े और सुनियोजित आपराधिक नेटवर्क की शुरुआत मात्र थी. पुलिस जांच में सामने आया है कि अपहरणकर्ताओं ने केरव गांधी के बाद शहर के पांच अन्य आर्थिक रूप से संपन्न लोगों को भी अगला निशाना बनाने की पूरी तैयारी कर रखी थी.
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मुख्य आरोपी गुरु सिंह और उसका गिरोह बिहार से जमशेदपुर आकर पिछले कई महीनों से इस साजिश को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था. गिरोह ने न केवल संभावित लक्ष्यों की सूची तैयार की थी, बल्कि उनकी दिनचर्या, आवाजाही के रास्ते, सुरक्षा व्यवस्था, घर और दफ्तर की लोकेशन, यहां तक कि आर्थिक लेन-देन की जानकारी भी जुटा ली थी. पुलिस का मानना है कि यह गिरोह लंबे समय तक शहर में रहकर सिलसिलेवार अपहरण की योजना पर काम कर रहा था.
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह ने केरव गांधी को सबसे “सुरक्षित और आसान टारगेट” मानते हुए सबसे पहले उनका अपहरण किया. योजना यह थी कि सफल अपहरण और फिरौती की रकम मिलने के बाद पुलिस पर दबाव और दहशत का माहौल बनाकर एक-एक कर अन्य लक्ष्यों को भी निशाना बनाया जाएगा. हालांकि, केरव गांधी के अपहरण के तुरंत बाद पुलिस की सक्रियता और त्वरित कार्रवाई ने गिरोह की इस योजना पर पानी फेर दिया.
इस पूरे मामले में पुलिस और अपराधियों के बीच हुई मुठभेड़ भी खासा चर्चा का विषय बनी हुई है. बिष्टुपुर थाना क्षेत्र में देर रात हुई इस मुठभेड़ में तीन अपहरणकर्ता गोली लगने से घायल हो गए थे. पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि अपहरणकर्ताओं ने साईं मंदिर के पास झाड़ियों में हथियार छिपा रखे हैं. जब पुलिस टीम आरोपियों के साथ हथियारों की बरामदगी के लिए मौके पर पहुंची, उसी दौरान आरोपियों ने अचानक पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी.
पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें तीन आरोपी गोली लगने से घायल हो गए. मुठभेड़ के बाद सभी घायलों को तत्काल एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया. अस्पताल सूत्रों के अनुसार, एक आरोपी के पैर में गोली फंसी हुई थी, जिसे डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर सफलतापूर्वक निकाल लिया है. फिलहाल सभी घायल आरोपियों की हालत स्थिर बताई जा रही है और डॉक्टरों की टीम उनकी लगातार निगरानी कर रही है.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अपहरण के बाद फिरौती वसूली की पूरी रणनीति पहले से तय थी. गिरोह ने फिरौती की रकम मिलने के बाद शहर में अपनी गतिविधियों को और विस्तार देने की योजना बनाई थी. पूछताछ में यह भी सामने आया है कि गिरोह के कुछ सदस्य स्थानीय स्तर पर सहयोगियों की तलाश में थे, ताकि शहर में लंबे समय तक टिककर वारदातों को अंजाम दिया जा सके.
अब तक इस मामले में कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि गिरोह के कुछ सदस्य अभी भी फरार हैं. पुलिस फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है. विभिन्न जिलों और सीमावर्ती इलाकों में पुलिस टीमों को अलर्ट पर रखा गया है. पुलिस का दावा है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान और भी अहम जानकारियां सामने आई हैं, जिससे इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने में मदद मिल रही है.
इस पूरे घटनाक्रम ने शहर में कानून-व्यवस्था और उद्योगपतियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि पुलिस का कहना है कि इस मामले में की गई त्वरित कार्रवाई से न केवल एक बड़े अपराध को रोका गया, बल्कि संभावित रूप से कई अन्य अपहरण की घटनाओं को भी समय रहते टाल दिया गया.
पुलिस अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि फरार आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा और शहर में इस तरह के संगठित अपराधों पर सख्ती से लगाम लगाई जाएगी. साथ ही, उद्योगपतियों और व्यापारियों की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.

