
उदित वाणी, नई दिल्ली/रांची: झारखंड में प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी की जांच को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में राज्य सरकार को देश की सर्वोच्च अदालत से झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से कराने के झारखंड हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार करते हुए राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है.
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस एमएम सुंदरेश्वर और जस्टिस एन कोटीश्वर सिंह की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की. राज्य सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने पक्ष रखा और हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सीबीआई जांच पर रोक लगाने की मांग की, जिसे शीर्ष अदालत ने स्वीकार नहीं किया. इस फैसले के बाद अब यह साफ हो गया है कि इस पूरे प्रकरण की सघन जांच सीबीआई द्वारा की जाएगी. विवाद की शुरुआत पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कर्मचारी संतोष कुमार की एक शिकायत से हुई थी.
मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी संतोष कुमार ने आरोप लगाया था कि 12 जनवरी को रांची स्थित ईडी कार्यालय में पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने उसके साथ मारपीट की और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया. इस शिकायत के आधार पर रांची के एयरपोर्ट थाना में ईडी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी. एफआईआर दर्ज होने के बाद रांची पुलिस ने ईडी कार्यालय पहुंचकर छापेमारी जैसी सक्रियता दिखाई थी, जिसे लेकर काफी विवाद हुआ था.
ईडी ने झारखंड पुलिस की इस कार्रवाई को केंद्रीय एजेंसी के कामकाज में अवैध हस्तक्षेप और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी. हाईकोर्ट के जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने 11 मार्च को अपने फैसले में कहा था कि मामले की निष्पक्षता के लिए इसकी जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए.
हाईकोर्ट ने न केवल पुलिस जांच पर रोक लगा दी थी, बल्कि ईडी कार्यालय की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी अर्धसैनिक बलों को सौंपने का निर्देश दिया था. राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका के जरिए चुनौती दी थी. सरकार का तर्क था कि पुलिस को अपनी जांच करने का अधिकार है.

