उदित वाणी, रांची: पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा के दुर्गम जंगलों में स्थित नोवामुड़ी प्रखंड के पोखरिया गांव में कोल्हान रक्षा संघ द्वारा आयोजित बैठक में आदिवासियों की मूलभूत समस्याएं खुलकर सामने आईं. हजारों की संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने विकास के दावों पर सवाल उठाते हुए प्रशासनिक उदासीनता पर नाराजगी जताई.
सारंडा के गांवों में समस्याओं का अंबार
बैठक की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष डिबार जोंकों ने की. गांव के मुंडा, मानकी और अन्य पारंपरिक प्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. ग्रामीणों ने बताया कि सरकारी अधिकारी क्षेत्र में शायद ही कभी पहुंचते हैं, जिससे समस्याएं वर्षों से जस की तस बनी हुई हैं.

वन पट्टा नहीं मिलने पर आक्रोश
ग्रामीणों ने प्रमुख रूप से यह मुद्दा उठाया कि राजस्व गांव होने के बावजूद उन्हें आज तक वन पट्टा नहीं मिला है. जबकि यह इलाका पांचवीं अनुसूची में आता है, इसके बावजूद अधिकारों से वंचित रहना संविधान की भावना के विपरीत बताया गया. लोगों ने इसे अपने मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करार दिया.
कुपोषण और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति
बैठक में महिलाओं और बच्चों की बड़ी संख्या ने पोषण आहार नहीं मिलने की शिकायत की. ग्रामीणों के अनुसार पोषाहार केंद्र होने के बावजूद नियमित आपूर्ति नहीं हो रही है, जिससे कुपोषण की स्थिति स्पष्ट दिखाई देती है. औसत आयु भी काफी कम पाई गई, जहां 48 वर्ष से अधिक आयु के बहुत कम लोग ही मौजूद थे.

सरकारी योजनाओं का नहीं मिल रहा लाभ
मैया सम्मान योजना सहित अन्य सरकारी योजनाओं में भारी अनियमितता की बात सामने आई. उपस्थित सैकड़ों महिलाओं में से केवल एक को ही योजना का लाभ मिला. इससे योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हुए.
रोजगार और पेंशन की स्थिति चिंताजनक
ग्रामीणों ने बताया कि वृद्धावस्था पेंशन कई महीनों से बंद है. आजीविका के लिए लोग पत्ता, दातुन और लकड़ी बेचकर जीवन यापन करते हैं. कई बार वन विभाग की कार्रवाई के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित
पोखरिया गांव में शिक्षा की स्थिति भी बेहद कमजोर पाई गई. यहां एक ही पारा शिक्षक के भरोसे पूरा विद्यालय संचालित हो रहा है, जो शिक्षा व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दर्शाता है.
संगठन ने उठाई ठोस कार्रवाई की मांग
कोल्हान रक्षा संघ के पदाधिकारियों ने प्रशासन से क्षेत्र की समस्याओं का समाधान करने और आदिवासियों को उनके अधिकार दिलाने की मांग की. बैठक में कई सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय प्रतिनिधि मौजूद रहे.


