
उदित वाणी, सरायकेला : जिला मुख्यालय सरायकेला में चर्चित सहकारिता बैंक घोटाला मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की विशेष अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्थानीय व्यवसायी संजय डालमिया, तत्कालीन शाखा प्रबंधक सुनील सतपति और बैंक कर्मचारी मनीष देवगन को दोषी करार दिया है। वहीं सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 30 अप्रैल की तिथि निर्धारित की गई है।
फैसले के बाद पूरे सरायकेला जिला मुख्यालय में इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। खासकर व्यवसायिक वर्ग में इस निर्णय के बाद हड़कंप की स्थिति देखी जा रही है।
एसीबी जांच में सामने आए ठोस साक्ष्य
मामले की जांच एसीबी के डीएसपी अनिमेष कुमार गुप्ता द्वारा की गई थी। उन्होंने अदालत में मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए आरोपों को साबित किया, जिसके आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी माना।
2019 में दर्ज हुए थे दो अलग-अलग मामले
यह घोटाला वर्ष 2019 में सामने आया था, जब सरायकेला स्थित कोऑपरेटिव बैंक में करोड़ों रुपये के ऋण वितरण में भारी अनियमितताओं का खुलासा हुआ था। जांच में पाया गया कि लगभग 38 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया था, जिसमें से करीब 32 करोड़ रुपये का लोन अकेले संजय डालमिया ने लिया था, जबकि शेष करीब 4 करोड़ रुपये अन्य लोगों को दिए गए थे।
सबसे गंभीर बात यह रही कि ऋण वितरण के बाद बैंक प्रबंधन द्वारा वसूली के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
दो प्राथमिकी दर्ज, एक मामले की सुनवाई पूरी
इस संबंध में सरायकेला थाना में वर्ष 2019 में दो अलग-अलग प्राथमिकी—कांड संख्या 118/2019 और 119/2019—दर्ज की गई थीं। दोनों मामलों की सुनवाई सीआईडी कोर्ट में चल रही थी, जिनमें से कांड संख्या 119/2019 की सुनवाई पहले ही पूरी हो चुकी है।
अब सभी की निगाहें 30 अप्रैल को होने वाली सजा की सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें दोषियों को सजा सुनाई जाएगी।

