उदित वाणी, रांची: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अंतर्गत परिवार नियोजन कार्यक्रम को सशक्त एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से डीपीएमयू (DPMU) कोऑर्डिनेटरों के लिए तीन दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण का सफल आयोजन किया गया. यह प्रशिक्षण 18 मार्च से 20 मार्च 2026 तक आईपीएच कॉन्फ्रेंस रूम, नामकुम में आयोजित हुआ.
मिशन निदेशक ने अपने संबोधन में कहा कि परिवार नियोजन कार्यक्रम राज्य के स्वास्थ्य तंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है. इसके प्रभावी क्रियान्वयन से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में व्यापक सुधार संभव है. उन्होंने सभी डीपीएमयू कोऑर्डिनेटरों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने जिलों में कार्यक्रम की गतिविधियों का बेहतर समन्वयन, प्रभावी क्रियान्वयन एवं सतत निगरानी सुनिश्चित करें.
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर विशेष फोकस
प्रशिक्षण के दौरान मिशन निदेशक ने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के सुदृढ़ीकरण, गुणवत्ता सुधार एवं सेवा वितरण को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि ग्रामीण स्तर तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में डीपीएमयू कोऑर्डिनेटरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है.
विशेषज्ञों ने दी विस्तृत जानकारी
प्रशिक्षण में विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने प्रशिक्षक के रूप में भाग लिया. इनमें डॉ. पुष्पा (स्टेट नोडल ऑफिसर, ट्रेनिंग/RTI), गुंजन खलखो (SFPC, NHM), सुदीप सान्याल (IPE Global), सुचंद्रा पांडा (ट्रेनिंग कंसल्टेंट, NHM), महर्षि रमण (SFM, NHM), नील रंजन सिंह (JMHIPDCL) और सुबोध कुमार (SDM, NHM) सहित कम्युनिटी मोबिलाइजेशन सेल, आईईसी सेल एवं एनयूएचएम सेल के राज्य नोडल पदाधिकारी उपस्थित रहे.
इस दौरान प्रतिभागियों को परिवार नियोजन कार्यक्रम से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं. साथ ही विभिन्न सेल द्वारा अपने-अपने कार्यक्रमों एवं गतिविधियों की विस्तृत जानकारी साझा की गई.
डीपीएमयू कोऑर्डिनेटरों को सौंपी गई जिम्मेदारियां
प्रशिक्षण में स्पष्ट निर्देश दिया गया कि परिवार नियोजन कार्यक्रम के अंतर्गत सभी गतिविधियों का समन्वय, क्रियान्वयन एवं संपादन डीपीएमयू कोऑर्डिनेटरों द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा. इसके साथ ही व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (CPHC) के अंतर्गत आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के सुदृढ़ीकरण की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी गई.
गैप एनालिसिस और NQAS प्रमाणन पर जोर
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का गैप एनालिसिस कर अवसंरचना, स्टाफिंग, ब्रांडिंग एवं उपकरणों की उपलब्धता से संबंधित जानकारी संबंधित चिकित्सा पदाधिकारी (MOIC) को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए. इसके अलावा अधिक से अधिक केंद्रों का NQAS प्रमाणन सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया, ताकि आमजन को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें.


