
उदित वाणी, जमशेदपुर: झारखंड की शिक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि पिछले एक दशक से झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) आयोजित नहीं होने के कारण प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी हो गई है। संगठन के मुताबिक, राज्य गठन के बाद से अब तक केवल वर्ष 2012 और 2016 में ही जेटेट परीक्षा हुई है, जिससे नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया ठप पड़ी है।
एआईडीएसओ के राज्य सचिव सोहन महतो ने वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य के लगभग 9,700 स्कूल वर्तमान में केवल एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षकों की कमी के कारण छात्रों का भविष्य अंधकारमय है। शिक्षक नियुक्ति नियमावली पांच बार तैयार हुई और तीन बार कैबिनेट तक पहुंची, लेकिन भाषा विवाद और राजनीतिक खींचतान के कारण इसे कभी अंतिम रूप नहीं दिया जा सका।
सोहन महतो ने जानकारी दी कि उच्च न्यायालय ने 31 मार्च तक परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया था, लेकिन सरकार की ओर से कोई पहल नहीं दिखी। 15 फरवरी को नियमावली पारित होनी थी, जिसे मंत्रियों के विरोध के बाद टाल दिया गया। हालांकि 21 अप्रैल से आवेदन प्रक्रिया शुरू होने की सूचना थी, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
एआईडीएसओ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जेटेट परीक्षा को लेकर स्पष्ट अधिसूचना जारी नहीं की गई, तो छात्र और युवा राज्यव्यापी उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे। संगठन का कहना है कि सरकार की उदासीनता के कारण लाखों पात्र अभ्यर्थी अपनी आयु सीमा पार कर रहे हैं और स्कूलों में शिक्षा का स्तर गिर रहा है।
