जमशेदपुर : दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक अनिल कुमार मिश्रा अपने सेवानिवृत्ति से पूर्व अंतिम निरीक्षण के तहत जब टाटानगर स्टेशन पहुंचे, तो उनका दौरा केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने चल रही विकास परियोजनाओं की जमीनी हकीकत को बारीकी से परखा। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्टेशन के पुनर्विकास कार्यों का जायजा लिया और कई अहम निर्देश भी दिए।
सबसे पहले महाप्रबंधक का ध्यान स्टेशन परिसर में बन रहे नए पार्किंग एरिया की ओर गया। यहां पहुंचकर उन्होंने कार्य की प्रगति देखी, जो अपेक्षा से काफी धीमी पाई गई। जानकारी के अनुसार इस पार्किंग परियोजना को मई 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित है, लेकिन वर्तमान गति को देखते हुए समयसीमा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह कार्य मुंबई की जी ए वी इंफ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड कंपनी द्वारा कराया जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि जहां प्रतिदिन लगभग 200 डंपर मिट्टी से भूमि भराव का कार्य किया जाना था, वहां मात्र 89 डंपर से ही काम चल रहा है। इस लापरवाही पर महाप्रबंधक अनिल कुमार मिश्रा ने नाराजगी जाहिर करते हुए मौके पर मौजूद साइट इंजीनियर को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कार्य में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और तय समयसीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करना होगा।
उन्होंने संबंधित एजेंसी को निर्देश दिया कि संसाधनों की संख्या बढ़ाई जाए और कार्य की गति में तत्काल सुधार लाया जाए, ताकि परियोजना में अनावश्यक देरी न हो। जीएम के इस सख्त रुख से स्पष्ट हो गया कि रेलवे प्रशासन अब विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से ले रहा है।
इसके बाद महाप्रबंधक ने टाटानगर स्टेशन के रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट की प्रगति की भी समीक्षा की। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि ‘गति शक्ति’ योजना के तहत स्टेशन भवन का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि अगले ढाई वर्षों के भीतर यात्रियों को एक आधुनिक, भव्य और सुविधायुक्त स्टेशन भवन मिलेगा, जो न केवल झारखंड बल्कि पूरे दक्षिण पूर्व रेलवे के लिए एक मॉडल स्टेशन साबित होगा।
उन्होंने कहा कि नए स्टेशन भवन में यात्रियों की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। इसमें आधुनिक वेटिंग हॉल, बेहतर टिकटिंग व्यवस्था, डिजिटल सूचना प्रणाली, एस्केलेटर, लिफ्ट और साफ-सुथरे प्लेटफॉर्म जैसी कई सुविधाएं शामिल होंगी। इससे यात्रियों का अनुभव पहले से कहीं अधिक बेहतर होगा।
रेलवे के बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में भी महाप्रबंधक ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि खड़गपुर से हावड़ा और चांडिल से गम्हरिया के बीच चौथी रेल लाइन को स्वीकृति मिल चुकी है। यह परियोजना भविष्य में बढ़ते रेल यातायात के दबाव को कम करने में सहायक होगी। इसके शुरू होने से ट्रेनों की संख्या में वृद्धि और परिचालन में सुगमता आने की उम्मीद है।
इसके साथ ही उन्होंने टाटानगर यार्ड के री-मॉडलिंग कार्य पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण परियोजना की शुरुआत मई माह से होने की संभावना है। यार्ड री-मॉडलिंग के पूरा होने के बाद ट्रेनों के परिचालन में होने वाली देरी को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
विशेष रूप से मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के बीच समन्वय बेहतर होगा, जिससे समयबद्धता में सुधार आएगा। इससे न केवल यात्रियों को लाभ मिलेगा, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र के लिए माल परिवहन भी अधिक सुचारु और तेज हो सकेगा।
कार्यक्रम के समापन पर चक्रधरपुर मंडल के अधिकारियों ने महाप्रबंधक के निरीक्षण को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के निरीक्षण से न केवल कार्यों में तेजी आती है, बल्कि कर्मचारियों में जवाबदेही भी बढ़ती है। अधिकारियों ने यह भी माना कि टाटानगर स्टेशन का पुनर्विकास और यार्ड सुधार परियोजनाएं भविष्य में रेलवे की कार्यक्षमता और सुरक्षा को एक नई दिशा देंगी।
कुल मिलाकर, महाप्रबंधक अनिल कुमार मिश्रा का यह अंतिम निरीक्षण कई मायनों में अहम साबित हुआ। एक ओर जहां उन्होंने धीमी गति से चल रहे कार्यों पर सख्ती दिखाई, वहीं दूसरी ओर भविष्य की योजनाओं का स्पष्ट रोडमैप भी प्रस्तुत किया। अब देखना यह होगा कि उनके निर्देशों के बाद विकास कार्यों की रफ्तार कितनी तेज होती है और टाटानगर स्टेशन कब अपने नए, आधुनिक स्वरूप में यात्रियों के सामने आता है।


