उदित वाणी, जमशेदपुर : गोविंदपुर के आनंदनगर में 16 मार्च को 30 वर्षीय ज्ञान किरण की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत अब एक अनसुलझी पहेली बनकर रह गई है। पुलिस ने कमरे के अंदर फंदे से लटका शव बरामद किया था, जिसके बाद पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिया गया और अंतिम संस्कार भी कर दिया गया।
मामले में मायका पक्ष की ओर से अस्वाभाविक मौत का केस दर्ज कराया गया, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि लिखित शिकायत में किसी पर भी आरोप या संदेह जाहिर नहीं किया गया। शुरुआती दौर में मृतका के भाई ने ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए थे, जिससे मामला गरमा गया था। हालांकि, बाद में बयान बदलने से पूरे घटनाक्रम की दिशा ही बदल गई।
पुलिस ने भी लिखित शिकायत के आधार पर आगे गहराई से जांच जरूरी नहीं समझी और केस को बंद कर दिया। ऐसे में सबसे अहम सवाल—आखिर ज्ञान किरण ने यह कदम क्यों उठाया—अब भी अनुत्तरित है।
स्थानीय लोगों में इसको लेकर नाराजगी है। उनका कहना है कि सच्चाई सामने लाने के लिए पुलिस को पहल करनी चाहिए थी, ताकि अगर कोई दोषी हो तो उसे सजा मिल सके। यह मामला अब भी कई सवाल खड़े कर रहा है।


