
उदित वाणी, जमशेदपुर: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर में “भारतीय ज्ञान प्रणाली में आयुर्वेद” विषय पर एक गरिमामयी एवं ज्ञानवर्धक विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शिक्षकों और विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक परंपरा के साथ
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चारण एवं मंगलाचरण के साथ हुई। संचालन डॉ. जितेंद्र कुमार ने किया, जिन्होंने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार, उपनिदेशक प्रो. राम विनय शर्मा, पूर्व निदेशक आईआईटी खड़गपुर प्रो. वी. के. तिवारी समेत कई प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
विशिष्ट वक्ता का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने विशिष्ट वक्ता डॉ. आनंद पांडेय को अंगवस्त्र एवं “ईशादि नौ उपनिषद” भेंट कर सम्मानित किया। यह सम्मान भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति उनके योगदान का प्रतीक रहा।
भारतीय ज्ञान परंपरा पर जोर
प्रो. वी. के. तिवारी ने अपने संबोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को इसके अध्ययन के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ज्ञान प्रणाली आज भी प्रासंगिक है और इसे समझना समय की आवश्यकता है।
आयुर्वेद की वैश्विक प्रासंगिकता
निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने अपने संबोधन में आयुर्वेद को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताया। उन्होंने इसके वैज्ञानिक दृष्टिकोण और वैश्विक स्तर पर बढ़ती स्वीकार्यता पर जोर दिया।
विशेषज्ञ व्याख्यान में आयुर्वेद की गहराई पर चर्चा
मुख्य वक्ता डॉ. आनंद पांडेय ने “भारतीय ज्ञान प्रणाली में आयुर्वेद” विषय पर विस्तार से व्याख्यान दिया। उन्होंने आयुर्वेद की मूल अवधारणाओं, वैज्ञानिक आधार और आधुनिक जीवन में इसकी उपयोगिता को सरल और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। उनके विचारों ने श्रोताओं को भारतीय परंपरा को नए दृष्टिकोण से समझने के लिए प्रेरित किया।
शांति मंत्र के साथ समापन
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया, जिसमें सभी अतिथियों, प्राध्यापकगण, आयोजन समिति और विद्यार्थियों के योगदान की सराहना की गई। अंत में शांति मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह आयोजन न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि भारतीय परंपरा और आयुर्वेद के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण साबित हुआ।

