
उदित वाणी,जमशेदपुर: साकची गुरुद्वारा कमेटी चुनाव को लेकर चल रहा विवाद झारखंड उच्च न्यायालय के फैसले के बाद भी पूरी तरह समाप्त नहीं हो सका है. अदालत ने याचिका का निस्तारण करते हुए स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, ऐसे में अब इस मामले में किसी भी तरह की आपत्ति के लिए संबंधित पक्ष सिविल न्यायालय का रुख कर सकते हैं.
यह मामला साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था, जिसमें अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें कानून-व्यवस्था के मद्देनजर चुनाव को सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की देखरेख में कराने का निर्देश दिया गया था.

न्यायमूर्ति आनंद सेन की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि जिस प्रशासनिक प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी, वह अब अप्रासंगिक हो चुकी है, क्योंकि चुनाव पहले ही संपन्न हो चुके हैं. इसी आधार पर अदालत ने याचिका को निष्पादित कर दिया.
अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि यदि किसी पक्ष को चुनाव प्रक्रिया या परिणाम को लेकर असंतोष है, तो वह विधि अनुसार सक्षम सिविल न्यायालय में चुनौती दे सकता है.
दो चुनाव, दो दावे
विवाद की जड़ में दो अलग-अलग चुनाव प्रक्रियाएं हैं. साकची गुरुद्वारा कमेटी ने अपनी ओर से चुनाव कराते हुए सतेंद्र सिंह रोमी को संयोजक बनाया था, जबकि इस पर आपत्ति जताते हुए हरविंदर सिंह मंटू और अन्य ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की थी. इसके बाद सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की निगरानी में भी चुनाव कराए गए.
इन दोनों प्रक्रियाओं के बाद एक ओर जहां साकची कमेटी ने निशान सिंह को प्रधान घोषित किया, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय कमेटी की देखरेख में हुए चुनाव में हरविंदर सिंह मंटू को प्रधान बताया गया.
फैसले के बाद भी दावे कायम
हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी दोनों पक्ष अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं. सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान भगवान सिंह ने कहा कि अदालत ने उनके पक्ष की वैधता को स्वीकार किया है और हरविंदर सिंह मंटू मुख्य सेवादार के रूप में कार्यभार संभालेंगे.
वहीं साकची गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान निशान सिंह ने इसे “सत्य और संविधान की जीत” बताते हुए कहा कि वे अपने पद पर बने रहेंगे और अदालत ने कहीं भी पुनः चुनाव कराने का निर्देश नहीं दिया है.
आगे क्या?
फिलहाल स्थिति यह है कि दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं और कोई स्पष्ट समाधान सामने नहीं आया है. ऐसे में अब इस विवाद का अंतिम निपटारा सिविल न्यायालय के माध्यम से ही संभव माना जा रहा है, यदि पक्षकार कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाते हैं.
साकची गुरुद्वारा चुनाव विवाद: घटनाक्रम की पूरी टाइमलाइन
|
समय/तिथि |
घटना |
विवरण |
|
शुरुआत (2025) |
चुनाव प्रक्रिया का आगाज |
साकची गुरुद्वारा कमेटी ने चुनाव की घोषणा की और सत्येंद्र सिंह रोमी को चुनाव संयोजक (Convener) नियुक्त किया. |
|
मई 2025 |
विपक्ष की शिकायत |
हरविंदर सिंह मंटू और अन्य सदस्यों ने चुनाव प्रक्रिया और संयोजक की नियुक्ति को गलत बताते हुए SDO धालभूम के पास शिकायत दर्ज कराई. |
|
28 मई 2025 |
SDO का बड़ा आदेश |
SDO ने हस्तक्षेप करते हुए आदेश दिया कि साकची गुरुद्वारा के चुनाव सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (CGPC) की निगरानी में होंगे. |
|
जून 2025 |
हाई कोर्ट में चुनौती |
साकची कमेटी के प्रधान निशान सिंह ने SDO के आदेश को चुनौती देते हुए झारखंड हाई कोर्ट में रिट याचिका (CWJC 2704/2025) दायर की. |
|
सुनवाई (मध्य 2025) |
स्टे (Stay) ऑर्डर |
हाई कोर्ट की पहली सुनवाई में SDO धालभूम के आदेश पर रोक (Stay) लगा दी गई, जिससे साकची कमेटी को अपनी प्रक्रिया जारी रखने का मौका मिला. |
|
विवादित मोड़ (2025-26) |
दो समानांतर चुनाव |
एक तरफ साकची कमेटी (संयोजक रोमी) ने चुनाव कराकर निशान सिंह को प्रधान घोषित किया. दूसरी तरफ CGPC ने अपनी प्रक्रिया पूरी कर हरविंदर सिंह मंटू को प्रधान घोषित कर दिया. |
|
25 मार्च 2026 |
हाई कोर्ट का फैसला |
न्यायमूर्ति आनंद सेन ने आदेश दिया कि चूंकि दोनों पक्ष दावा कर रहे हैं कि चुनाव हो चुके हैं, इसलिए कोर्ट के पास तय करने को कुछ नहीं बचा है. पीड़ित पक्ष अब सिविल कोर्ट जा सकता है. |

