
जमशेदपुर: अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद की जमशेदपुर एवं सरायकेला-खरसावां शाखा के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को ‘ जुड़ शीतल’ सह मिथिला नववर्ष समारोह का भव्य आयोजन किया गया. इस अवसर पर मिथिला की समृद्ध संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और भाषा के सम्मान को लेकर मंथन किया गया.
मिट्टी और प्रकृति से जुड़ाव का पर्व है जुड़ शीतल
समारोह के मुख्य अतिथि आरक्षी उपाधीक्षक (DSP) सुनील चौधरी ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जुड़ शीतल केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि मिट्टी से जुड़ाव का संदेश है. यह पर्व हमें सिखाता है कि मनुष्यों के साथ-साथ वृक्षों और सरोवरों को भी जीवंत रखना हमारा कर्तव्य है.
नियोजन नीति में मैथिली की उपेक्षा पर जताई चिंता
अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार झा ‘अविचल’ ने कहा कि नववर्ष हमें आत्म-विश्लेषण और भाषा के प्रति संकल्प लेने का अवसर देता है. कार्यक्रम में मौजूद सभी वक्ताओं ने एक स्वर में झारखंड की नियोजन नीति में मैथिली को स्थान न मिलने पर गहरा रोष व्यक्त किया और इसे ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार दिया.
सम्मान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ
कार्यक्रम की शुरुआत पंडित विपिन कुमार झा के स्वस्तिवाचन और मैथिल-मिथिलानियों द्वारा प्रस्तुत भगवती वंदना से हुई. अतिथियों का स्वागत पारंपरिक ‘पाग-दोपटा’ और गुलदस्ता भेंट कर किया गया. स्वागत भाषण अध्यक्ष अशोक कुमार लाल दास ने दिया.
प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति: समारोह में अरविंद विद्रोही, डॉ. रवींद्र कुमार चौधरी, कृष्ण मुरारी झा, पंकज कुमार झा और हंसराज जैन ने भी अपने विचार साझा किए.
कवि सम्मेलन: कविताओं के रंग, हास्य के संग
विचार गोष्ठी के बाद डॉ. अशोक कुमार झा ‘अविचल’ की अध्यक्षता में एक शानदार कवि सम्मेलन आयोजित किया गया. इसमें शिव कुमार झा ‘टिल्लू’, अशोक पाठक ‘स्नेही’, नूतन झा, गोपाल चन्द्र झा, अन्नपूर्णा झा, विवेकानंद झा, रुपम झा, पिंकी अमर झा, पूनम ठाकुर, ममता कर्ण और विभा कुमारी ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और खूब हंसाया.
पारंपरिक व्यंजनों का आनंद
समारोह के अंत में आगंतुकों ने जुड़ शीतल के पारंपरिक पकवानों—दालपूड़ी, आम की चटनी, बड़ी और खीर—का जमकर लुत्फ उठाया. कार्यक्रम का संचालन राजीव रंजन (महासचिव, सरायकेला शाखा) और धन्यवाद ज्ञापन विपिन कुमार झा (महासचिव, जमशेदपुर शाखा) ने किया.
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