
उदित वाणी, जमशेदपुर: कुड़मी समाज चांडिल के तत्वावधान में करम-परब मिलन समारोह सह विचार गोष्ठी का आयोजन समाज के सचिव अशोक कुमार की अध्यक्षता में कदमडीह स्थित कार्यालय परिसर में किया गया.
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि टोटेमिक कुरमी/कुड़मी विकास मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष शीतल ओहदार ने कहा कि भारत सरकार 3 मई 1913 के गजट में प्रकाशित पत्रांक 550 में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि मुंडा, उरांव, संथाल, पान जैसे कुल 13 आदिवासी हैं.
इसके पास उत्तराधिकार और विरासत के तथ्यात्मक नियम भी हैं, जो भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1865 से मेल नहीं खाते हैं. उन्हें इस कानून से मुक्त किया जाता है, लेकिन दुख की बात यह है कि उपरोक्त 13 में 12 को 1952 में एसटी सूची में शामिल कर लिया गया और कुड़मी को छोड़ दिया गया। इसके खिलाफ 20 सितंबर से रेल रोको आंदोलन की घोषणा की गई है.
इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए 15 कुड़मी नामधारी संगठनों ने एक साथ मिलकर आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है. इस कार्यक्रम का संचालन जनसंपर्क सचिव गुणधाम मुतरुआर के द्वारा किया गया.
मौके पर वरिष्ठ शिक्षक जयचांद बांसरिआर, शीतल पुनअरिआर, दामोदर तिड़ुआर, रमेशचंद्र काड़ुआर, कलेश्वर काड़ुआर, दिलीप कुमार चिलबिंधा, चित्तरंजन महतो, कार्तिक बांसरिआर, झाबुराम महतो, राजकिशोर हिंदइआर, सुबोध पुनरियार, देवेन्द्र नाथ आदि उपस्थित थे.

