
उदित वाणी, जमशेदपुर/नई दिल्ली : झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के ग्रामीण क्षेत्र से बुनियादी ढांचे की घोर लापरवाही और प्रशासनिक विफलता का एक हृदयविदारक मामला सामने आया है. ‘वॉयस फॉर जस्टिस’ (Voices for Justice), जनमित्र न्यास (JMN) और पीवीसीएचआर (PVCHR) के माध्यम से हाशिए पर रहने वाले समुदायों की आवाज उठाते हुए इस घटना पर न्याय की गुहार लगाई गई है.
क्या है पूरा मामला?
यह घटना 16 सितंबर 2025 की रात की है. जमशेदपुर के घाटशिला उपमंडल स्थित डैनमारी गांव की निवासी नानिका हेंब्रम (42 वर्ष) रात करीब 9 बजे शौचालय की सुविधा न होने के कारण घर से बाहर गई थीं. अंधेरे और खराब दृश्यता के कारण वह अनजाने में जमीन के पास लटक रहे 11,000 वोल्ट के हाई-वोल्टेज बिजली के तार की चपेट में आ गईं.
गंभीर रूप से झुलसी नानिका को ग्रामीणों ने आनन-फानन में एमजीएम (MGM) अस्पताल पहुँचाया, लेकिन उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया. वह अपने पीछे चार बच्चों का रोता-बिलखता परिवार छोड़ गई हैं.
सिस्टम पर खड़े होते गंभीर सवाल
इस दुखद मृत्यु ने ग्रामीण बुनियादी ढांचे की पोल खोल दी है:
1. रिहायशी इलाके में हाई-वोल्टेज नंगा तार जमीन के इतने करीब क्यों था?
2. क्या बिजली विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण और रखरखाव किया जा रहा था?
3. ‘स्वच्छ भारत’ के दावों के बीच आज भी ग्रामीण महिलाएं रात में बाहर जाने को मजबूर क्यों हैं?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का कड़ा रुख
मानवाधिकार कार्यकर्ता लेनिन रघुवंशी (PVCHR) द्वारा 29 सितंबर 2025 को दर्ज कराई गई शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है.
27 मार्च 2026 को जारी अपने आदेश में आयोग ने पूर्वी सिंहभूम के जिला मजिस्ट्रेट (DM) को नोटिस जारी किया है. आयोग ने निर्देश दिया है कि:
* इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए.
* पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिलाने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएं.
* चार सप्ताह के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट (Action Taken Report – ATR) आयोग को सौंपी जाए.
