
उदित वाणी, जमशेदपुर: शहर में इन दिनों रसोई गैस की किल्लत ने आम लोगों की रसोई पर गहरा असर डाल दिया है. स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि गैस सिलेंडरों की खुलेआम कालाबाजारी हो रही है और उपभोक्ताओं को कई गुना अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है.
जानकारी के अनुसार, घरेलू गैस सिलेंडर जिसकी निर्धारित कीमत करीब 953 रुपये है, वह 2800 से 3000 रुपये तक बेचा जा रहा है. वहीं 1900 रुपये का वाणिज्यिक सिलेंडर 4200 से 4500 रुपये तक पहुंच गया है. उपभोक्ताओं को एजेंसियों द्वारा स्टॉक खत्म होने का हवाला देकर लौटाया जा रहा है, जबकि पहचान वालों को ऊंचे दाम पर सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है. इस स्थिति ने वितरण प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
कालाबाजारी का बदला तरीका
प्रशासनिक कार्रवाई से बचने के लिए कालाबाजारी करने वालों ने अपने तौर-तरीके भी बदल लिए हैं. अब घर-घर डिलीवरी के बजाय सुनसान स्थानों पर गैस की आपूर्ति की जा रही है. इसके साथ ही केवल नकद भुगतान लिया जा रहा है, ताकि लेन-देन का कोई डिजिटल रिकॉर्ड न बने. एजेंसी के वाहनों की जगह निजी वाहनों का उपयोग कर यह नेटवर्क संगठित तरीके से काम करता नजर आ रहा है.
छोटे कारोबारियों व आम लोगों पर सबसे ज्यादा असर
गैस संकट का सबसे अधिक असर आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायियों पर पड़ा है. कई घरों में लोग मजबूरी में लकड़ी, कोयला या इंडक्शन पर खाना बनाने लगे हैं. वहीं छोटे होटल, ठेले और फूड स्टॉल बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं. इसका असर खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी पड़ा है, जहां 10 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है.

