
उदित वाणी, जमशेदपुर: जमशेदपुर के मानगो स्थित गंगा मेमोरियल हॉस्पिटल के संस्थापक और वरिष्ठ सर्जन डॉ. नागेंद्र सिंह का आज सुबह निधन हो गया। वे गरीब और असहाय मरीजों की मुफ्त सर्जरी और इलाज के लिए पूरे झारखंड में प्रसिद्ध थे। उनकी निःस्वार्थ सेवा और मानवतावादी दृष्टिकोण के कारण उन्हें “सब्जी वाले डॉक्टर” और गरीबों के मसीहा के रूप में भी जाना जाता था। डॉ. नागेंद्र सिंह का स्वास्थ्य दो दिन पहले अचानक बिगड़ गया था, जिसके बाद उन्हें जमशेदपुर से दिल्ली एयर एम्बुलेंस के जरिए अपोलो अस्पताल ले जाया गया। वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखने के बावजूद आज उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके साथ इस कठिन समय में उनकी पत्नी रंजू सिंह मौजूद रहीं। उनका पार्थिव शरीर आज देर शाम दिल्ली से जमशेदपुर लाया जा रहा है।
डॉ. सिंह ने अपने 30 साल से अधिक के कैरियर में लगभग एक लाख ऑपरेशन किए, जिनमें 14 हजार गरीब मरीजों का निःशुल्क ऑपरेशन शामिल था। वे लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के क्षेत्र में विशेषज्ञ थे। उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई मगध विश्वविद्यालय से पूरी की और एमएस (सर्जरी) का पोस्टग्रेजुएशन रिम्स, रांची से किया। इसके बाद उन्होंने निजी लाभ के बजाय समाजसेवा को प्राथमिकता देते हुए ग्रामीण इलाकों में कैंप लगाकर मरीजों का इलाज और ऑपरेशन करना शुरू किया।
उन्होंने अपनी माताजी माँ गंगा देवी की स्मृति में मानगो में “गंगा मेमोरियल हॉस्पिटल” की स्थापना की। यहाँ बड़ी संख्या में ऑपरेशन बेहद कम शुल्क या पूरी तरह मुफ्त किए जाते थे। कई बार मरीजों से फीस के बजाय सब्ज़ियाँ स्वीकार करने की वजह से उन्हें “सब्जी वाले डॉक्टर” कहा गया। उनकी इस सेवा भावना के लिए उन्हें झारखंड की तत्कालीन राज्यपाल और वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सहित विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया।
हजारों गरीब और वंचित मरीजों को नि:शुल्क चिकित्सा उपलब्ध कराने वाले डॉ. नागेंद्र सिंह की गिनती देश के चुनिंदा और अत्यंत सम्मानित चिकित्सकों में होती थी। उनका सरल, मिलनसार और सेवा-भावपूर्ण व्यक्तित्व उन्हें धरती का भगवान कहे जाने का गौरव प्रदान करता था.

