
उदित वाणी, रांची/जमशेदपुर : राज्य में ड्राइविंग प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान [इन्स्टीच्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च टियर-1] की स्थापना जमशेदपुर के मनपीठा मौजा में की जायेगी. इसका संचालन टाटा मोटर्स द्वारा किया जायेगा. गुरूवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आयोजित राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में इसको लेकर विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन [डीपीआर] की प्राक्कलित राशि 22 करोड़ 3 लाख 31 हजार रुपये की मंजूरी दी गई.
परियोजना : राज्य में ड्राइविंग प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान की स्थापना.
स्थान: मनपीठा मौजा, जमशेदपुर.
राशि: 22,03,31,000 रुपये
संचालक: टाटा मोटर्स
इन्स्टीच्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च (आईडीटीआर) टियर-1 संस्थान एक मॉडल सेंटर के रूप में काम करते हैं जहाँ वैज्ञानिक और आधुनिक तरीके से ड्राइविंग ट्रेनिंग दी जाती है. इनका मुख्य लक्ष्य कुशल ड्राइवर तैयार करना और सडक़ सुरक्षा बढ़ाना है. टियर 1 संस्थान स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से लगभग 18.50 करोड़ रुपये तक की एकमुश्त सहायता दी जाती है.
वास्तविक ड्राइविंग अनुभव के लिए उच्च स्तरीय ड्राइविंग सिम्युलेटर होता है जो बारिश, कोहरा और रात में ड्राइविंग जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का अनुभव कराता है. संस्थान के पास अपने स्वयं के हल्के और भारी वाहन होते है ताकि प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जा सके. यहाँ केवल बुनियादी ड्राइविंग ही नहीं, बल्कि डिफेंसिव ड्राइविंग और ईंधन दक्षता जैसे उन्नत विषयों पर भी शोध और प्रशिक्षण दिया जाता है.यहाँ कॉमर्शियल ड्राइवरों के लिए इंडक्शन कोर्स, रिफ्रेशर कोर्स और खतरनाक सामान ले जाने वाले ड्राइवरों के लिए विशेष ट्रेनिंग दी जाती है. जो उम्मीदवार यहाँ से सफलतापूर्वक ट्रेनिंग पूरी कर फॉर्म -5 बी सर्टिफिकेट प्राप्त करते हैं, उन्हें आरटीओ में ड्राइविंग टेस्ट देने से छूट मिल सकती है. ये संस्थान आमतौर पर पीपीपी मॉडल पर चलते हैं. राज्य सरकार जमीन देती है, केंद्र पैसा देता है, और कोई निजी ऑटोमोबाइल कंपनी (जैसे मारुति सुजुकी या टाटा मोटर्स) इसका संचालन करती है. झारखंड सरकार ने ड्राइविंग प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान की स्थापना के लिए टाटा मोटर्स के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) साझा किया है. इस एमओयू के तहत महिला ड्राइवरों, विशेष रूप से पिंक ऑटो चालकों को भी प्रशिक्षित करने पर विशेष जोर दिया गया है. सालाना लगभग 3,000 से अधिक प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है.झारखंड में इस प्रकार के संस्थान की आवश्यकता इसलिए भी अधिक थी क्योंकि कोल्हान का यह क्षेत्र औद्योगिक और खनन गतिविधियों का केंद्र है, जहाँ भारी वाहनों के कुशल चालकों की हमेशा मांग रहती है.यह परियोजना केंद्र सरकार, राज्य सरकार और निजी क्षेत्र (टाटा मोटर्स) के सहयोग का एक बेहतरीन उदाहरण है.
आईडीटीआर टियर-1 परियोजना: कुल बजट ब्रेक-अप
योगदानकर्ता – आवंटित राशि – विवरण
2 भारत सरकार – 17,00,00,000 रुपये – सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा अनुदान
2 टाटा मोटर्स लिमिटेड – 1,82,00,000 रुपये – सीएसआर और तकनीकी भागीदारी
2 झारखंड सरकार – 3,21,31,000 रुपये – राज्य द्वारा वहन की जाने वाली राशि
कुल प्राक्कलित राशि – 22,03,31,000 रुपये कुल प्रशासनिक स्वीकृति

