उदित वाणी चक्रधरपुर : चक्रधरपुर रेल मंडल में हाथियों की सुरक्षा और ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन को लेकर रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है। दक्षिण पूर्व रेलवे जोन ने आसनबनी से झारसुगुड़ा स्टेशन तक रेलवे लाइन की घेराबंदी (फेंसिंग) के लिए 193 करोड़ रुपये से अधिक की योजना को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना के तहत लगभग 270 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के दोनों ओर मजबूत बैरिकेडिंग की जाएगी, जिससे हाथियों और अन्य मवेशियों के ट्रैक पर आने की घटनाओं पर रोक लगेगी।
चार महीने पहले किए गए सर्वे के आधार पर यह फैसला लिया गया है। मंजूरी मिलते ही रेलवे ने टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। टाटा से हावड़ा रूट पर पहले से ही कई संवेदनशील इलाकों में बैरिकेडिंग का काम पूरा हो चुका है, जबकि कुछ स्थानों पर अभी कार्य जारी है।
यह पहल सिर्फ जानवरों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ट्रेन संचालन भी अधिक सुरक्षित और तेज होगा। रेलवे का मानना है कि भविष्य में 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चलाने में यह फेंसिंग अहम भूमिका निभाएगी।
इसके साथ ही रेलवे ने 11 संवेदनशील स्थानों पर ट्रैक के नीचे अंडरपास बनाने का भी निर्णय लिया है, ताकि हाथी बिना किसी बाधा के सुरक्षित तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान तक जा सकें।
चक्रधरपुर रेल मंडल झारखंड और ओडिशा के कई वन क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जहां हाथियों का आवागमन सामान्य है। वन विभाग के इनपुट के आधार पर दर्जनभर सेक्शन को ‘एलिफेंट कॉरिडोर’ घोषित किया गया है। इन क्षेत्रों में जब भी हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलती है, ट्रेनों की गति धीमी कर दी जाती है और लोको पायलट सतर्कता के लिए हूटर बजाते हैं।
पिछले 10 वर्षों में बांसपानी और राउरकेला रूट पर करीब 15 हाथियों और उनके बच्चों की ट्रेन से कटकर मौत हो चुकी है। इसी गंभीर समस्या को देखते हुए रेलवे ने यह व्यापक योजना बनाई है।
तकनीक के स्तर पर भी रेलवे पीछे नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए हाथियों की निगरानी की योजना पर काम चल रहा है। इस तकनीक के जरिए जैसे ही कोई हाथी ट्रैक के पास आता है, कंट्रोल रूम को तुरंत अलर्ट मिल जाता है। तमिलनाडु जैसे राज्यों में इस तकनीक से हाथियों की मौत की घटनाएं लगभग खत्म हो चुकी हैं।
रेलवे की यह पहल मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक बड़ा और जरूरी कदम मानी जा रही है।


