
उदित वाणी, जमशेदपुर : जमशेदपुर के हाता-जादूगोड़ा मुख्य मार्ग स्थित रंकिणी मंदिर परिसर के धुमकुड़िया भवन में शुक्रवार को भूमिज समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को सशक्त बनाना और पेसा (PESA) कानून के तहत ग्रामीणों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में सिंहभूम, मानभूम, बराहभूम और धालभूम क्षेत्रों से आए हातु सरदार, मुड़ा, नाया और डाकुआ ने हिस्सा लिया।
विधायक संजीव सरदार के प्रयास से मिली पारंपरिक व्यवस्था को मान्यता
पोटका के विधायक संजीव सरदार इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे। बैठक में वक्ताओं ने जानकारी दी कि पूर्व में सरकारी अधिसूचना में भूमिज स्वशासन व्यवस्था को उचित स्थान नहीं मिला था। हालांकि, विधायक संजीव सरदार के निरंतर प्रयासों के बाद अब हातु सरदार, मुड़ा, नाया और डाकुआ की पारंपरिक व्यवस्था को अधिसूचित कर आधिकारिक मान्यता दे दी गई है। इससे अब गांव के संचालन और निर्णय प्रक्रिया में इनकी भूमिका अत्यंत प्रभावी हो जाएगी।
पेसा नियमावली: जल, जंगल और जमीन पर ग्रामसभा का अधिकार
बैठक को संबोधित करते हुए विधायक संजीव सरदार ने कहा कि राज्य गठन के 25 वर्षों बाद पेसा नियमावली को मंजूरी मिलना आदिवासी समाज के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
ग्रामसभा की सर्वोच्चता: अब गांव के विकास या भूमि अधिग्रहण के लिए ग्रामसभा की अनुमति अनिवार्य होगी।
संसाधन प्रबंधन: ग्रामीण अब जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों का प्रबंधन स्वयं कर सकेंगे।
विवादों का समाधान: स्थानीय स्तर के विवादों को अब पारंपरिक न्यायिक व्यवस्था के माध्यम से सुलझाया जा सकेगा।
सामाजिक एकजुटता और सशक्तिकरण पर जोर
विधायक ने सभी हातु सरदार और मुड़ा समाज के प्रतिनिधियों से अपील की कि वे अपनी नई संवैधानिक शक्तियों का उपयोग गांव के विकास और समाज की मजबूती के लिए करें। बैठक में अभिषेक सरदार, कालीपद सरदार, सिदेश्वर सरदार सहित भूमिज समाज के सैकड़ों गणमान्य लोग उपस्थित थे, जिन्होंने समाज की सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखने का संकल्प लिया।

