जमशेदपुर: लौहनगरी के विभिन्न बस्तियों और मंदिरों में आज ‘मंगला पूजा’ पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाई गई. चैत्र मास के मंगलवार को होने वाली इस पूजा का खास महत्व है, जहाँ भक्त अपनी कठिन साधना और भक्ति से माँ मंगला को प्रसन्न करते हैं
मानगो के डायगुट्टू क्षेत्र में बड़ी संख्या में महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर इस धार्मिक आयोजन में भाग लिया.
कलश यात्रा से हुआ आयोजन का शुभारंभ
सुबह से ही महिलाएं सिर पर कलश रखकर नदी घाट की ओर रवाना हुईं. घाट पर पहुंचकर उन्होंने विधि-विधान के साथ पवित्र जल भरा. इसके बाद महिलाएं भक्ति गीतों और मंगल गान के साथ कतारबद्ध होकर पूजा स्थल की ओर बढ़ीं, जिससे पूरे रास्ते में धार्मिक माहौल बना रहा.
भक्तिमय बना पूरा वातावरण
कलश यात्रा के दौरान पूरे मार्ग में श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला. जगह-जगह स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए विशेष व्यवस्था की, जिससे आयोजन की भव्यता और भी बढ़ गई. भक्ति गीतों और सामूहिक सहभागिता ने माहौल को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया.
पूजा स्थल पर विधि-विधान से अनुष्ठान
पूजा स्थल पर पहुंचकर महिलाओं ने कलश स्थापना कर पूरे विधि-विधान से मंगला पूजा संपन्न की. इस दौरान उन्होंने परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की.
आस्था और परंपरा का सुंदर संगम
कुल मिलाकर मंगला पूजा का यह आयोजन सामूहिक आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक एकता का एक जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं की सहभागिता ने इसे और भी विशेष बना दिया.
धधकते अंगारों पर चलने की अनूठी परंपरा
इस उत्सव का सबसे मुख्य और रोमांचक आकर्षण ‘अग्नि परीक्षा’ रही. शहर के कई क्षेत्रों, विशेषकर भुइयांडीह, बारीडीह और बागबेड़ा के कुछ मंदिरों में भक्तों ने धधकते कोयले के अंगारों पर नंगे पाँव चलकर अपनी मन्नतें पूरी कीं. मान्यता है कि माँ की कृपा से भक्तों के पैर नहीं जलते और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.


