
उदित वाणी, जमशेदपुर: शहर के मशहूर अधिवक्ता निशांत अखिलेश ने कहा की सरकार का काम है नागरिक के मौलिक अधिकारों का बचाव करना. अगर वह यह नहीं करती है तो वह शासन करने की वैधता खो देती है.
अखिलेश शनिवार को गांधी पीस फाउंडेशन जमशेदपुर द्वारा ट्राइबल कल्चरल सेंटर सोनारी में सार्वभौमिक मानव और संवैधानिक मूल्य विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के समापन समारोह में बोल रहे थे. उन्होंने मानव अधिकार के इतिहास पर प्रकाश डाला और कहा कहा कि अमेरिका में पहली बार संविधान ने मानव अधिकार को नागरिकों के मौलिक अधिकार के रूप में दिया.
10 दिसंबर, 1948 में विभिन्न देशों ने यूनिवर्सल डिक्लेरेशन ऑफ़ ह्यूमन राइट्स को लागू किया, जिसमे दुनिया के प्रत्येक नागरिक के पास मानव अधिकार है. हर देश को नए कानून बनाकर इसे लागू करना था.
भारत में भी सुप्रीम कोर्ट किसी भी मानवाधिकार उल्लंघन पर अंतर्राष्ट्रीय कानून का सहारा लेती है. उन्होंने युवाओं को सलाह दिया कि वे ज्यादा से ज्यादा अध्ययन करें और कानून की अधिक से अधिक जानकारी लें. निशांत अखिलेश ने कहा कि शिक्षा से ही युवा अपने अधिकारों को जान सकते हैं.
वैज्ञानिक सोच जरूरी
कार्यशाला के पहले सत्र में साइंस कम्युनिकेटर डीएनएस आनंद ने “मौजूदा भारत में वैज्ञानिक चेतना ” विषय पर विस्तार से अपनी बात रखी. उन्होंने बताया कि विज्ञान में कोई अंतिम सत्य नहीं है.
सत्य बदलता रहता है. यह बात इसे धर्म से अलग करता है. उन्होंने इसबात पर ज़ोर दिया की भारत का संविधान अनूठा है क्योंकि इसमें नागरिकों के लिए वैज्ञानिक चेतना विकसित करना एक मौलिक कर्तव्य के तौर पर शामिल है. वैज्ञानिक सोच हमारे निजी और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित करता है. लोग भावनात्मक तौर पर निर्णय लेते हैं जो तथ्यपरक नही होता.
उन्होंने कहा कि विज्ञान के दौर में भी आज समाज में डायन हत्या जैसी कुरीतियां है. आज के दौर में देश के युवाओं के ऊपर बड़ी ज़िम्मेदारी है कि बेहतर समाज और देश का निर्माण करें. इसके लिए मानवीय मूल्यों के अलावा वैज्ञानिक सोच और वैज्ञानिक तरीके को अपनाना जरूरी है.
मीडिया के सामने चुनौतियों बढ़ी हैं
दूसरे सत्र में “लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका और मौजूदा चौनौतियां ” विषय पर पत्रकार संजय प्रसाद ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है.
इसकी जिम्मेदारी है कि अगरकार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से निर्वाह नहीं करें तो उस पर सवाल खड़ा करे. उन्होंने बताया कि मीडिया ने इतिहास में सकारात्मक भूमिका निभाई है. आजादी के आंदोलन में भी उसने जनमुद्दों को उठाया. संविधान ने आम नागरिकों को भी कुछ शर्तो के साथ अभिव्यक्ति की आजादी दी है, लेकिन उन्होंने चिंता जाहिर की आज मीडिया पर पूंजी हावी है.
पिछले कुछ वर्षों में मीडिया का कॉरपोरेट और सरकार के साथ गठजोड़ मजबूत हुआ है. दो तीन कॉर्पोरेट्स मीडिया का नियंत्रण कर रहे है. लेकिनआज वैकल्पिक मीडिया का उभार हुआ है जिसमे विरोध के स्वर को उप्युक्त जगह मिल रही है.
समापन सत्र में सभी प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को लेकर अपना फीडबैक और सुझाव दिया. प्रतिभागियों को अंत में सर्टिफिकेट प्रदान किया गया.अंतिम दिन वर्कशोप में छात्रों केअलावा अरविंद अंजुम, विकास, डीएनएस आनंद, संजय प्रसाद, विक्रम झा, अंकुर, अनमोल, अंकित, रमन , दिनेश यादव और चंदन कुमार ने उपस्थिति दर्ज कराई.


