
उदित वाणी,जमशेदपुर : वैश्विक संस्था स्टीलवॉच (SteelWatch) द्वारा जारी ‘कॉर्पोरेट स्कोरकार्ड 2026’ ने दुनिया भर की स्टील कंपनियों के पर्यावरण संरक्षण के दावों की पोल खोल दी है। 31 मार्च, 2026 को जारी इस रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की 18 प्रमुख स्टील कंपनियों में से कोई भी कंपनी ‘क्लीन ट्रांजिशन’ (स्वच्छ परिवर्तन) की कसौटी पर खरी नहीं उतरी है।
टाटा स्टील (Tata Steel) को इस इंडेक्स में 100 में से केवल 27.5 अंक प्राप्त हुए हैं।
जमशेदपुर और कलिंगानगर में कोयले पर निर्भरता
रिपोर्ट में मुख्य रूप से टाटा स्टील के भारतीय परिचालन (जमशेदपुर और कलिंगानगर प्लांट) में कोयले पर आधारित ब्लास्ट फर्नेस (Blast Furnace) तकनीक के निरंतर उपयोग को कम अंक मिलने का बड़ा कारण बताया गया है। स्टीलवॉच के अनुसार, इस सेक्टर के कुल उत्सर्जन का 90% हिस्सा इसी पुरानी तकनीक से आता है। हालांकि टाटा स्टील ने 2045 तक ‘नेट जीरो’ का लक्ष्य रखा है, लेकिन वर्तमान निवेश और जमीनी स्तर पर कोयले का विकल्प खोजने की रफ्तार अभी भी धीमी है।

स्कोरकार्ड के मुख्य बिंदु:
- कोई भी पास नहीं: 100 अंकों के इस मूल्यांकन में दुनिया की किसी भी कंपनी ने 50 का आंकड़ा पार नहीं किया।
- टाटा स्टील की स्थिति: 27.5 अंकों के साथ टाटा स्टील को ‘अंडरपरफॉर्मिंग पेलोटन’ (उम्मीद से कम प्रदर्शन करने वाला समूह) में रखा गया है।
- ग्रीन आयरन का अभाव: रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीन हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग में सभी कंपनियों का औसत स्कोर 25 में से 1 अंक से भी कम रहा।
टाटा स्टील का पक्ष और भविष्य की योजनाएं
भले ही स्कोरकार्ड कम रहा हो, लेकिन टाटा स्टील ने हाल ही में झारखंड सरकार के साथ ₹11,000 करोड़ (1.2 बिलियन डॉलर) के निवेश के लिए समझौता (MoU) किया है। इसके तहत जमशेदपुर में अत्याधुनिक HISARNA और EASyMelt जैसी ‘ग्रीन स्टील’ तकनीकों पर काम शुरू हो चुका है। कंपनी का लक्ष्य 2030 तक जमशेदपुर में 1 मिलियन टन क्षमता का ग्रीन स्टील प्लांट स्थापित करना है, जो कार्बन उत्सर्जन को 50% तक कम कर सकता है।
वैश्विक स्तर पर तुलना:
| कंपनी का नाम | देश | स्कोर (100 में से) |
| SSAB | स्वीडन | 46.2 |
| Thyssenkrupp | जर्मनी | 41.9 |
| JSW Steel | भारत | 29.6 |
| Tata Steel | भारत | 27.5 |
| Nippon Steel | जापान | 16.8 |
| HBIS Group | चीन | 8.3 |
स्टीलवॉच की कार्यकारी निदेशक कैरोलिन एशले के अनुसार, कंपनियों के वादों और उनके कार्यों के बीच एक गहरी खाई (Readiness Gap) है। जमशेदपुर जैसे औद्योगिक शहरों के लिए यह रिपोर्ट एक चेतावनी है कि भविष्य में वैश्विक बाजारों में टिके रहने के लिए पारंपरिक कोयला आधारित उत्पादन को जल्द से जल्द बदलना होगा।

