
उदित वाणी,जमशेदपुर: टाटा स्टील लिमिटेड द्वारा टाटा स्टील स्पंज आयरन प्लांट, जोडा में दो दिवसीय 8वें वार्षिक पर्यावरण सम्मेलन ‘+इंपैक्ट 2026’ (एनवायरनमेंट मैनेजमेंट ऑन प्रोएक्टिव एक्शन) का सफल आयोजन किया गया। 18 और 19 मार्च को आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक अनुपालन से आगे बढ़कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति सक्रिय प्रतिबद्धता और आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देना था।
देशभर से जुटे विशेषज्ञ और वरिष्ठ नेतृत्व
इस सम्मेलन में टाटा स्टील के देशभर के विभिन्न संयंत्रों से पर्यावरण विशेषज्ञों, प्लांट ऑपरेशन टीमों और तकनीकी समाधान प्रदाताओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में टाटा स्टील के सेफ्टी, हेल्थ एवं सस्टेनेबिलिटी विभाग के वाइस प्रेसिडेंट राजीव मंगल सहित रॉ मटेरियल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए राजीव मंगल ने कहा, “पर्यावरण संरक्षण केवल एक नियम नहीं, बल्कि एक साझा जिम्मेदारी है। इसे हमें अपने दैनिक संचालन, निर्णय लेने की प्रक्रिया और दीर्घकालिक योजनाओं का हिस्सा बनाना होगा।”
4C कल्चर के जरिए पर्यावरण प्रबंधन
सम्मेलन के दौरान टाटा स्टील के ‘4C कल्चर कोड’ (Change, Connect, Contribute, Care) पर विशेष चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि कैसे यह कल्चर कोड सजग पर्यावरण प्रबंधन में सहायक है:
Change (बदलाव): नई तकनीकों को अपनाते हुए पर्यावरण सुधार के लिए तैयार रहना।
Connect (जुड़ाव): विभिन्न टीमों के बीच समन्वय स्थापित कर बेहतरीन अनुभवों को साझा करना।
Contribute (योगदान): पर्यावरण सुधार की दिशा में व्यक्तिगत और सामूहिक सक्रियता।
Care (परवाह): प्राकृतिक संसाधनों और आसपास के समुदायों के प्रति संवेदनशीलता।
AI और ऑटोमेशन: भविष्य का समाधान
सम्मेलन का दूसरा दिन आधुनिक तकनीकी समाधानों के नाम रहा। तकनीकी विशेषज्ञों ने कई उन्नत प्रणालियाँ पेश कीं, जिनमें शामिल हैं:
वायु और जल निगरानी: डिजिटल मॉनिटरिंग और धूल-धुआं निष्कर्षण प्रणाली।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): पर्यावरण निगरानी और उत्सर्जन में कमी लाने के लिए AI और ऑटोमेशन का उपयोग।
संसाधन प्रबंधन: जल उपयोग की दक्षता बढ़ाने के लिए डिजिटल टूल्स का प्रदर्शन।
ठोस परिणामों की उम्मीद
सम्मेलन का समापन उन ठोस उपायों की पहचान के साथ हुआ जिन्हें जमीनी स्तर पर लागू किया जाएगा। इन प्रयासों से न केवल वायु और जल की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि औद्योगिक जोखिमों में भी कमी आएगी, जिससे स्थानीय समुदायों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित हो सकेगा।
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