
उदित वाणी जमशेदपुर: जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने चक्रधरपुर डिवीजन के अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रेनों की लेटलतीफी रोकने में नाकाम चक्रधरपुर डिवीजन के रेल अफसर अब जनता को गुमराह करने के लिए झूठ परोस रहे हैं। सरयू राय ने कहा कि सीनियर डीसीएम द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रेनों की ’65 से 70 प्रतिशत पंक्चुअलिटी’ का दावा पूरी तरह आधारहीन है और वे इसकी गणना का आधार बताएं।
टाटानगर इंफ्रास्ट्रक्चर और देरी का गणित: विधायक ने सवाल उठाया कि जब ट्रेनें चांडिल, कांड्रा और राखा माइंस तक समय पर पहुंच जाती हैं, तो वहां से टाटानगर जंक्शन आने में उन्हें तीन से साढ़े तीन घंटे क्यों लगते हैं? उन्होंने अधिकारियों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि मेधावी मस्तिष्क वाले ये अफसर तकनीकी शब्दावली का सहारा लेकर आम जनता को बेवकूफ बना रहे हैं, जबकि टाटानगर में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
रेलमंत्री के वीडियो का जिक्र: सरयू राय ने रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव के एक वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि रेलमंत्री ने स्वयं स्वीकार किया है कि लौह-अयस्क (Iron Ore) की ढुलाई के कारण मालगाड़ियों का दबाव बढ़ा है, जिससे यात्री ट्रेनें लेट हो रही हैं। हालांकि, श्री राय ने सवाल किया कि स्टील प्लांट तो दशकों से चल रहे हैं, फिर यह संकट अचानक इतना गहरा क्यों हो गया?
आंदोलन का राजनीतिकरण या जनमुद्दा? वरिष्ठ नेता ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू से बात की है। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से भी इस आंदोलन में शामिल होने का आग्रह किया है। सरयू राय ने कहा कि जब रेलवे अधिकारी जनहित की मांगों को ‘राजनीतिक बयान’ बताते हैं, तो लगता है कि उनके खुद के दिमाग में राजनीति घुस गई है।
स्टील, इस्पात और जनशताब्दी के यात्री परेशान: उन्होंने कहा कि कोलकाता जाने वाली प्रमुख ट्रेनों जैसे स्टील एक्सप्रेस, इस्पात एक्सप्रेस और जनशताब्दी का समय से परिचालन न होना स्थानीय लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहा है। घाटशिला, बहरागोड़ा और आदित्यपुर क्षेत्र के हजारों लोग इन ट्रेनों पर निर्भर हैं।
आंदोलन को व्यापक बनाने की चेतावनी: सरयू राय ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन अब सिर्फ जमशेदपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे घाटशिला से बहरागोड़ा और सरायकेला तक ले जाया जाएगा। उन्होंने मांग की कि यात्री ट्रेनों को प्राथमिकता दी जाए और जो समय बचे उसमें मालगाड़ियों का परिचालन हो।

