
उदित वाणी, जमशेदपुर/टाटानगर: टाटानगर समेत प्रमुख रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में अवैध वेंडरों की घुसपैठ रोकने के लिए रेलवे ने एक बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है। अब वेंडरों की पहचान के लिए क्यूआर कोड आधारित डिजिटल आईकार्ड प्रणाली लागू की जाएगी। इस नई व्यवस्था के तहत यदि जांच के दौरान किसी वेंडर के पास डिजिटल आईकार्ड नहीं मिला, तो आरपीएफ (RPF) उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी।
सुरक्षा व्यवस्था होगी मजबूत, फर्जी वेंडरों की पहचान होगी आसान
वर्तमान में टाटानगर से चक्रधरपुर, चांडिल और खड़गपुर रूट की ट्रेनों में अवैध वेंडर रेलवे के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। कई वेंडर तो दो साल से बंद पड़े “फूड ट्रेक” रेस्टोरेंट की टी-शर्ट पहनकर यात्रियों को गुमराह कर रहे हैं। क्यूआर कोड स्कैन करते ही वेंडर की पूरी कुंडली सामने आ जाएगी, जिससे यात्रियों को फर्जी वेंडरों से बचने में मदद मिलेगी और चोरी व ठगी जैसी वारदातों पर अंकुश लगेगा।
पेंट्रीकार विवादों पर लगेगा विराम, यात्रियों को मिलेगी सुरक्षित सेवा
अवैध वेंडिंग के कारण अक्सर अधिकृत पेंट्रीकार कर्मचारियों और अवैध वेंडरों के बीच विवाद और मारपीट की घटनाएं होती हैं। मुंबई मेल और पुरुषोत्तम एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में ऐसी हिंसक झड़पें पहले भी देखी जा चुकी हैं। रेलवे का मानना है कि डिजिटल आईकार्ड व्यवस्था से कैटरिंग एजेंसी के असली वेंडरों की पहचान स्पष्ट होगी, जिससे न केवल पेंट्रीकार की बिक्री में सुधार होगा बल्कि यात्रियों को भी भरोसेमंद खानपान सेवा मिल सकेगी।
