
उदित वाणी, जमशेदपुर: लौहनगरी की एक अदालत ने दहेज हत्या (Dowry Death) के चर्चित मामले में नामजद आरोपी सोनू कुशवाहा को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मंजू कुमारी के न्यायालय ने परिस्थिति जन्य साक्ष्य (Circumstantial Evidence) पर्याप्त न होने के कारण यह फैसला सुनाया.
4 सितंबर 2021 को हुई थी सुषमा कुशवाहा की संदिग्ध मौत
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, 4 सितंबर 2021 को संदिग्ध परिस्थितियों में सुषमा कुशवाहा की मृत्यु हो गई थी. सुषमा के पिता और गदड़ा गोविंदपुर निवासी राज नारायण कुशवाहा ने दिसंबर 2020 में अपनी बेटी की शादी की थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी को पति सोनू कुशवाहा, ससुर-सास, ननद और देवर मिलकर दहेज के लिए प्रताड़ित करते थे. पिता ने दामाद पर हत्या का आरोप लगाते हुए 5 सितंबर 2021 को सोनारी थाना में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई थी.
प्रति परीक्षण में ससुर ने स्वीकार की अहम बात
न्यायालय में सुनवाई के दौरान मामले में उस वक्त नया मोड़ आया जब मृतका के पिता और सूचक राज नारायण कुशवाहा ने प्रति परीक्षण (Cross-examination) में स्वीकार किया कि बेटी की मृत्यु के समय उनका दामाद सोनू कुशवाहा दिल्ली में था. उन्होंने यह भी माना कि उन्होंने यह नहीं देखा था कि उनकी बेटी को जहर किसने दिया. साथ ही, उन्होंने बताया कि प्राथमिकी मुन्ना तिवारी ने लिखी थी और उन्होंने केवल उस पर हस्ताक्षर किए थे.
अधिवक्ताओं ने कोर्ट में रखा बचाव पक्ष
न्यायालय में आरोपी सोनू कुशवाहा और उनके परिवार के सदस्यों की ओर से बचाव अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू, शिव शंकर प्रसाद और बबिता जैन ने दलीलें पेश कीं. वकीलों ने साक्ष्यों की कमी और आरोपी की अनुपस्थिति को प्रमुख आधार बनाया, जिसके बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषमुक्त करार दिया.

