
उदित वाणी, जमशेदपुर : मार्च 2026 के अंतिम सप्ताह में दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने जमशेदपुर के जादूगोड़ा थाना क्षेत्र और आसपास के इलाकों में बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 करोड़ रुपये से अधिक की ऑनलाइन ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है. इस कार्रवाई में कई युवकों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें मुख्य रूप से राज भगत और आकाश कुमार कालिंदी शामिल हैं.
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह सोशल मीडिया के जरिए लोगों को फर्जी निवेश का झांसा देकर और “डिजिटल अरेस्ट” की धमकी देकर ठगी करता था. शुरुआती जांच में इस नेटवर्क के तार देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों—खासतौर पर कंबोडिया और दुबई—से जुड़े होने की आशंका जताई गई है.
ऐसे रचते थे ठगी का जाल
जांच में सामने आया है कि आरोपी फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आकर्षक विज्ञापन डालते थे, जिनमें कम समय में अधिक मुनाफा देने का दावा किया जाता था. जब कोई व्यक्ति इन विज्ञापनों के झांसे में आता, तो उसे व्हाट्सऐप या टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ा जाता था.
शुरुआत में पीड़ित को छोटे-छोटे लाभ दिखाकर भरोसा कायम किया जाता था, लेकिन बाद में असली खेल शुरू होता था. गिरोह के सदस्य खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर कॉल करते और कहते कि पीड़ित का नाम किसी बड़े अपराध में सामने आया है. इसके बाद उसे “डिजिटल अरेस्ट” में लेने की बात कहकर मानसिक दबाव बनाया जाता था.
क्या है “डिजिटल अरेस्ट”
“डिजिटल अरेस्ट” साइबर अपराध का नया तरीका है, जिसमें ठग वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित को यह विश्वास दिलाते हैं कि वह कानूनी रूप से गिरफ्त में है. ठग फर्जी वर्दी, नकली पहचान पत्र और सरकारी दस्तावेज दिखाकर माहौल तैयार करते हैं.
पीड़ित को घंटों तक वीडियो कॉल पर रोके रखा जाता है, ताकि वह किसी और से संपर्क न कर सके. इस दौरान उसे डराया जाता है कि अगर उसने सहयोग नहीं किया, तो उसे तुरंत जेल भेज दिया जाएगा. डर और भ्रम की स्थिति में आकर लोग ठगों के निर्देश मानने लगते हैं.
35 से अधिक बैंक खातों का इस्तेमाल
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि इस गिरोह ने ठगी के पैसे को इधर-उधर करने के लिए 35 से अधिक बैंक खातों का उपयोग किया. पीड़ितों से कहा जाता था कि वे जांच के नाम पर अपनी रकम “सुरक्षित खाते” में ट्रांसफर करें.
कई मामलों में ई-वॉलेट और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए भी लेन-देन कराया गया, जिससे पैसे का पता लगाना मुश्किल हो जाए. रकम मिलते ही उसे तुरंत कई खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था.
इस गिरोह द्वारा दिल्ली के एक वरिष्ठ नागरिक से 7 लाख रुपये की ठगी का मामला भी सामने आया है, जो इस बड़े नेटवर्क का हिस्सा है.
छापेमारी में मिले अहम सबूत
दिल्ली पुलिस साइबर सेल की विशेष टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से जादूगोड़ा, इचड़ा और आसपास के इलाकों में एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी की.
इस दौरान पुलिस ने मोबाइल फोन, लैपटॉप, सिम कार्ड, बैंक पासबुक और संदिग्ध लेन-देन से जुड़े दस्तावेज बरामद किए हैं. इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे गिरोह के नेटवर्क को खंगाला जा रहा है और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है.
विदेशी कनेक्शन की जांच तेज
पुलिस को शक है कि इस गिरोह का संचालन आंशिक रूप से विदेशों से किया जा रहा था. कंबोडिया और दुबई में बैठे संचालकों के साथ इनका सीधा संपर्क हो सकता है. इस एंगल पर जांच एजेंसियां गहराई से काम कर रही हैं और जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से सहयोग लिया जाएगा.
सावधान रहें, ऐसे करें बचाव
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती और न ही जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने को कहती है.
यदि किसी व्यक्ति को इस तरह का कॉल आता है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और इसकी सूचना साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस स्टेशन को दें. अनजान लिंक, निवेश ऑफर और संदिग्ध कॉल से दूर रहना ही सबसे बड़ा बचाव है.
जादूगोड़ा जमशेदपुर में हुई यह कार्रवाई साइबर अपराध के बदलते स्वरूप को उजागर करती है. “डिजिटल अरेस्ट” जैसे नए हथकंडों से अपराधी लोगों को मानसिक रूप से फंसाकर बड़ी ठगी को अंजाम दे रहे हैं. ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही इस खतरे से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है.

