
उदित वाणी, रांची : झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ में पेसा एक्ट नियमावली लागू करने की मांग को लेकर दाखिल अवमानना याचिका पर गुरूवार को फिर सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान पेसा नियमावली लागू करने को लेकर सरकार की ओर से खंडपीठ को स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई. इस पर खंडपीठ ने गहरी नाराजगी जताते हुए सरकार को 23 दिसंबर तक इस संबंध में स्पष्ट जानकारी देने का निर्देश दिया.
अदालत ने कहा कि यदि उक्त तिथि तक नियमावली लागू करने के लिए समय की स्पष्ट जानकारी नहीं दी जायेगी, तो हाईकोर्ट कड़ा रूख अपनाएगी. इसके साथ ही अदालत ने बालूघाटों समेत लघु खनिजों के आवंटन पर रोक को बरकरार रखा. सुनवाई के दौरान पंचायती राज विभाग के सचिव खंडपीठ के समक्ष उपस्थित हुए. अदालत ने सचिव से पूछा कि पेसा कानून से संबंधित नियमावली कैबिनेट में पेश किया गया है या नहीं. इस पर विभागीय सचिव ने जानकारी देने के लिए समय देने का आग्रह किया.
खंडपीठ ने इस आग्रह को स्वीकार करते हुए सुनवाई के लिए मंगलवार को अगली तिथि निर्धारित की है. ज्ञात हो कि पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि पंचायती राज विभाग ने पेसा नियमावली का प्रारूप तैयार कर लिया गया है. इस प्रारूप को कैबिनेट को-आर्डिनेशन कमेटी को भेजा गया था तथा आपत्ति आने पर फिर से संशोधित कर ड्राफ्ट कमेटी को भेजा गया है. वहां से इसे कैबिनेट भेजा जाएगा.
गौरतलब है कि आदिवासी बुद्धिजीवी मंच की ओर से इस मामले में अवमानना याचिका दाखिल की गई है. प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता तान्या सिंह ने पक्ष रखा और कहा कि पंचायतों में अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार अधिनियम 1996 [पेसा कानून] केंद्र सरकार ने 1996 में लागू किया है. लेकिन एकीकृत बिहार से लेकर झारखंड गठन के बाद तक राज्य सरकार ने अब तक इस कानून के तहत नियमावली नहीं बनाई है. झारखंड सरकार ने बर्ष 2019 और 2023 में पेसा नियमावली का ड्राफ्ट तैयार किया था. लेकिन उसे लागू नहीं किया गया. जबकि पूर्व में ही अदालत ने पेसा एक्ट लागू करने का आदेश दिया है. इधर अदालत द्वारा सख्त रूख अपनाये जाने के बाद 23 दिसंबर को कैबिनेट की बैठक आहूत की गई है.

