
उदित वाणी, रांची : आईएएस अमीत कुमार के बाद शराब घोटाला मामले में पूर्वी सिंहभूम के डीसी कर्ण सत्यार्थी ने भी रांची सिविल कोर्ट परिसर स्थित न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता [बीएनएसएस] की धारा 183 के तहत अपना बयान दर्ज कराया. कर्ण सत्यार्थी पूर्व में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के आयुक्त उत्पाद सह झारखंड स्टेट बेवरेजेज कारपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक के पद पर रहे हैं. उन्होंने भी अपने बयान की कॉपी सीलबंद करके सौंपा है.
बताया गया कि आईएएस कर्ण सत्यार्थी ने भी शराब घोटाले के पीछे पूर्व उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे का हाथ होने की जानकारी दी है. वहीं शराब घोटाला मामले की जांच कर रही एसीबी ने पूर्व में कर्ण सत्यार्थी से लगातार तीन दिनों तक पूछताछ की थी. पूर्व उत्पाद आयुक्त कर्ण सत्यार्थी पर आरोप है कि तत्कालीन उत्पाद नीति को लेकर शराब की खुदरा दुकानों में फर्जी बैंक गारंटी पर मैनपावर आपूर्ति का ठेका लेनेवाली दोनों प्लेसमेंट एजेंसियों के विरुद्ध उन्होंने मामला उजागर होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की. इन दोनों ही प्लेसमेंट एजेंसियों में मेसर्स मार्शन व मेसर्स विजन शामिल हैं. उनके विरुद्ध न तो प्राथमिकी दर्ज की और न हीं कोई कानूनी कार्रवाई की.
इतना ही नहीं उनके कार्यकाल में भी प्रदेश में एमआरपी से अधिक कीमत पर शराब की बिक्री के मामले सामने आते रहे. लेकिन उसे रोकने के लिए उन्होंने कोई ठोस पहल नहीं की. गौरतलब है कि एक दिन पहले 15 दिसंबर को उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के पूर्व उत्पाद आयुक्त अमीत कुमार का भी न्यायिक दंडाधिकारी के सामने बीएनएसएस की धारा 183 के तहत बयान दर्ज कराया गया है. उनके बयान की भी कॉपी सीलबंद कर सौंपा गया है.

