
गिरफतारी के लिए आरपीएफ ने तलाशी अभियान भी कर दी तेज
उदित वाणी, रांची : कुड़मि समुदाय के रेल टेका, डहर छेंका आंदोलन मामले में रेलवे ने बड़ी कार्रवाई की. 20 सितंबर को कुड़मि समाज द्वारा आंदोलन के दौरान किये गये रेल चक्का जाम को लेकर रेलवे सुरक्षा बल आरपीएफ द्वारा सख्ती दिखाते हुए सोनुआ तथा सीनी-गम्हारिया और गम्हारिया-कांड्रा रेल खंड मामले में 2000 से ज्यादा आंदोलनकारियों पर केस दर्ज किया गया तथा जानकारी के मुताबिक आरपीएफ ने आरोपियों की धर-पकड़ के लिए तलाश भी तेज कर दी है.
आंदोलनकारियों पर चक्का जाम करने, रेलवे कार्य में बाधा डालने और सुरक्षा बलों से अभद्रता करने जैसे आरोप लगाए गए हैं. प्राथमिकी में बताया गया कि सीनी-गम्हारिया और गम्हारिया-कांड्रा रेल खंड में 20 सितंबर सुबह 7.30 बजे से लेकर 21 सितंबर सुबह 7.10 बजे तक लगभग 23 घंटे रेल परिचालन बाधित रहा. जबकि इस मामले में सीनी आरपीएफ पोस्ट में रेलवे एक्ट की धारा 174-ए, 145 और 147 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है.
नामजद आरोपियों में गौतम महतो, प्रकाश महतो, जगदीश महतो, नवीन महतो, सोमू महतो, कुलदीप महतो, आनंद महतो समेत 2500 से अधिक अज्ञात लोगों को शामिल किया गया है. वहीं बताया गया कि सोनुआ रेल खंड में 20 सितंबर को सुबह 11.30 बजे से शाम 5.00 बजे तक चक्का जाम किया गया. इस घटना को लेकर चक्रधरपुर आरपीएफ ने रेलवे एक्ट की धारा 174-ए, 145, 146 और 147 के तहत मामला दर्ज किया है. यहां सिर्फ अमित महतो को नामजद किया गया है. जबकि अन्य 500 लोगों को अज्ञात अभियुक्त बनाया गया है.
यद्यपि रेल चक्का जाम के दौरान अमित महतो ने दावा किया था कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और इसमें किसी तरह की तोड़फोड़ या हिंसा नहीं हुई. उन्होंने मांग की थी कि आंदोलनकारियों पर कोई मामला दर्ज न किया जाए. रांची डीआरएम की ओर से भी किसी आंदोनलकारी के खिलाफ मुकदमा नहीं करने का लिखित आश्वासन दिया गया है. इसके बावजूद रेलवे प्रशासन ने मामला दर्ज कर रेल सेवाओं को बाधित करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने का संकेत दिया है. गौरतलब है कि कुड़मि समाज के लोगों ने उन्हें अनुसूचित जनजाति श्रेणी में शामिल करने की मांग को लेकर 20 सितंबर को पटरियों में उतर कर राज्यभर में रेल सेवा को पूरी तरह ठपप कर दिया था.

