
उदित वाणी, जमशेदपुर : टाटा स्टील और टाटा स्टील फाउंडेशन की ओर से मंगलवार 23 सितंबर को डिसेबिलिटी पर एक मीडिया जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया. इसका उद्देश्य दिव्यांगता के बारे में समझ को मज़बूत करना और ऐसे व्यक्तियों के समावेशी और ज़िम्मेदार मीडिया प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देना था. कार्यशाला में पत्रकारों ने इस बात पर चर्चा की कि समावेशी संचार कैसे जनधारणा और नीतिगत कार्रवाई को प्रभावित कर सकता है.
कार्यशाला का उद्देश्य मीडिया पेशेवरों को दिव्यांगता के मुद्दों के सटीक, सम्मानजनक और सशक्त चित्रण के महत्व के प्रति संवेदनशील बनाना था. सत्रों में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016, नैतिक कहानी-वाचन, दिव्यांगता के प्रकार, भाषा संवेदनशीलता और मीडिया के नैतिक प्रतिनिधित्व के 5 सिद्धांतों पर चर्चा शामिल थी.

इस सत्र में सबल कार्यक्रम के पूर्व दिव्यांग छात्रों द्वारा साझा सत्र भी शामिल था, जिसमें मोहम्मद रफीक (फॉगिंग मशीन ऑपरेटर, टीएसयूआईएसएल), मीना कुमारी (विषय विशेषज्ञ, दृष्टिबाधित, सबल) और बलबीर कौर, आरजे, रेडियो उड़ान शामिल थे. अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के अवसर पर मीडिया प्रतिनिधियों ने भारतीय सांकेतिक भाषा की मूल बातें भी सीखीं. कार्यशाला का समापन मीडिया घरानों को डिजिटल और प्रिंट सामग्री में दिव्यांगजनों को ध्यान में रखते हुए संपादकीय और उचित प्रतिनिधित्व अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु सामूहिक आह्वान के साथ हुआ. इस कार्यशाला के विशेषज्ञ कुमार गौरव और कोनिका रावत थे.

