
उदित वाणी, जमशेदपुर : राउरकेला रेलवे पार्किंग में फर्जी जीएसटी नंबर के विवाद के बाद अब टाटानगर रेलवे पार्किंग पर भी सख्त जांच की तैयारी की जा रही है। चक्रधरपुर रेल मंडल के सीनियर डीसीएम ने पूरे मंडल की रेलवे पार्किंग व्यवस्था की जीएसटी जांच के आदेश दिए हैं। खास बात यह है कि केवल टाटानगर रेलवे पार्किंग ही नहीं, बल्कि पूरे चक्रधरपुर रेल मंडल के सभी रेलवे पार्किंग की जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह कदम रेलवे विभाग की पारदर्शिता सुनिश्चित करने और ठेकेदारों द्वारा की जा रही अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से उठाया हुआ ठोस कदम है।
सूत्रों के अनुसार, रेलवे पार्किंग ठेकेदारों द्वारा फर्जी जीएसटी नंबर का उपयोग कर पार्किंग का संचालन करने और अवैध रूप से अतिरिक्त शुल्क वसूलने के आरोप सामने आए हैं। वाहन चालकों की लगातार शिकायतों के बाद मामला उजागर हुआ था। सबसे पहले राउरकेला पार्किंग में किसी वाहन चालक द्वारा जीएसटी नंबर की जांच कराई गई थी, जिसमें पता चला कि जीएसटी नंबर फर्जी था। इस खुलासे ने पूरे मामले को तूल दे दिया और रेलवे प्रशासन को सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया।
इस पूरे मामले में खास बात यह भी है कि पार्किंग का ठेका देने से पहले सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच की गई थी। ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसे फर्जी दस्तावेज कैसे मंजूर हो गए। यही नहीं, जिन अधिकारियों की टेबल से यह दस्तावेज आगे बढ़े, उनपर भी गाज गिरना लगभग तय माना जा रहा है। रेलवे विभाग की सख्ती को देखते हुए आने वाले दिनों में संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
चक्रधरपुर रेल मंडल के वरिष्ठ डीसीएम ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि रेलवे विभाग पारदर्शिता और ईमानदारी के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने के लिए पूरी जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष और सख्ती से अंजाम देगा। उन्होंने यह भी कहा कि जांच के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिस भी ठेकेदार ने फर्जी जीएसटी नंबर का उपयोग किया है या अवैध शुल्क वसूल किया है, उस पर कठोर कार्रवाई होगी।
टाटानगर रेलवे पार्किंग पहले से ही विवादों के घेरे में रहा है। वाहन चालकों ने समय-समय पर अधिक शुल्क वसूलने की शिकायतें प्रशासन के सामने रखी गई हैं। यह मामला डीआरएम से लेकर सीनियर डीसीएम तक भी पहुंच चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। अब चक्रधरपुर रेल मंडल की ओर से इस पूरे मामले को लेकर व्यापक जांच शुरू की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वाले ठेकेदार और अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
रेलवे यात्री संघ और अन्य सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि रेलवे स्टेशन पर पार्किंग सुविधा यात्रियों के लिए सहूलियत बननी चाहिए, न कि अतिरिक्त लाभ कमाने का जरिया। उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द सख्त कदम उठाने की मांग की है।
आगामी दिनों में चक्रधरपुर रेल मंडल की जांच टीम द्वारा पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कर मामले की सच्चाई सामने लाई जाएगी। इसके साथ ही सभी ठेकेदारों को जीएसटी से संबंधित सभी जरूरी दस्तावेज समयबद्ध तरीके से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। रेलवे प्रशासन का कहना है कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ रेलवे अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में फर्जीवाड़ा करने वाले ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारी अब नहीं बच पाएंगे।

