
उदित वाणी, जमशेदपुर : शहर के होमगार्ड जवान अजय प्रसाद की सड़क हादसे में इलाज के अभाव में मौत हो गई. मिली जानकारी के अनुसार 14 अगस्त को न्याय सदन से ड्यूटी पूरी कर लौटने के क्रम में उनका एक्सीडेंट हुआ. घायल अवस्था में उन्हें पहले एमजीएम अस्पताल ले जाया गया, जहाँ स्थिति नाजुक बताई गई. इसके बाद टाटा मेन हॉस्पिटल में भर्ती किया गया. डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें रांची रिम्स रेफर किया गया, लेकिन वहाँ समय पर भर्ती और उचित इलाज नहीं मिल पाया. बाद में एक निजी अस्पताल में वेंटिलेटर पर रखने के बावजूद उनकी हालत बिगड़ती गई और अंततः 18 अगस्त की रात उनका निधन हो गया.
इस घटना से पूरे जमशेदपुर और राज्य के होमगार्ड जवानों में गहरा आक्रोश और शोक की लहर है. जवानों का कहना है कि सरकार दावा करती है कि किसी को इलाज के अभाव में नहीं भटकना पड़ेगा, लेकिन होमगार्ड जवानों के मामले में यह सच साबित नहीं हुआ. उनका आरोप है कि पुलिस बल के जवानों को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन होमगार्ड को हमेशा उपेक्षित रखा जाता है.
अजय प्रसाद संगठन में हमेशा अपने साथियों के अधिकारों की लड़ाई लड़ते रहे थे. उनके निधन से संगठन ने एक जुझारू साथी खो दिया है. सोमवार को उनका पार्थिव शरीर रिम्स से जमशेदपुर लाया गया, जहाँ होमगार्ड कार्यालय परिसर में गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई. इस दौरान बड़ी संख्या में महिला व पुरुष गृह रक्षक मौजूद रहे. विभागीय नियमों के अनुसार उनके बड़े बेटे धीरज कुमार को तत्काल सहायता राशि ₹10,000 प्रदान की गई.
शहरवासियों और साथियों ने अजय प्रसाद की शहादत को याद करते हुए कहा कि सरकार को होमगार्ड जवानों के अधिकार और स्वास्थ्य सुविधा की अनदेखी बंद करनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह का दर्द न सहना पड़े.

