
उदित वाणी, रांची: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु अपने दो दिवसीय झारखंड दौरे के क्रम में दूसरे दिन गुरूवार को खूंटी के बिरसा मुंडा स्टेडियम में आयोजित महिला स्वयं सहायता समूह सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुईं.
इस अवसर पर उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों से भी सीधा संवाद किया. राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन के दौरान झारखंड के विकास की धीमी गति पर चिंता जतायी. उन्होंने कहा कि जबकि एक बार छोड़कर झारखंड में अधिकांश मुख्यमंत्री आदिवासी समुदाय से ही बने. इसके अलावा राज्य में 28 से ज्यादा एमएलए आदिवासी चुने जाते हैं.
राज्य को अलग हुए 22 साल से ज्यादा हो गया। फिर भी झारखंड को जितनी तरक्की करनी चाहिए थी. उतना नहीं हो पाया. इसके बारे में सोचने की जरूरत है. वहीं उन्होंने कहा कि इस राज्य ने मुझे काफी सम्मान दिया है.
मैं ओडिशा से जरूर हूं. लेकिन मेरी रगों में झारखंड का खून बहता है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की महिला व बाल विकास मंत्री जोबा मांझी जिस घर की बहू है. मेरी दादी उसी घर से थी.
बचपन में उन्हें उबली महुआ खाकर भी भूख मिटाना पड़ा
इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने बचपन की किस्सा बतायी और कहा कि गांव से 5-6 किलोमीटर की दूरी पर उनके खेत थे. खेतों की आड़ियों [मेड़] पर महुआ के 22 पेड़ थे. उनकी दादी रात को दो बजे उठाकर उन्हें महुआ चुनने ले जाती थी. इसके बाद महुआ चुनकर उसे सुखाकर पोटोम बांधकर रखते थे.
साल भर में उसमें कीड़ा लग जाता था. कई बार हमारे पास अनाज नहीं होता था. तो हम महुआ को उबालकर खा लेते थे. तब 20-25 पैसे प्रति किलो महुआ बिकता था. लेकिन आज हमारी बहनें महुआ से केक, लड्डू व अन्य चीजें बनाकर ऊंची कीमतों पर बाजार में बेच रही है.
अब महिलाओं को देखकर थोड़ी ईर्ष्या होती है और सोचती हूं काश मुझे भी बचपन में यह ज्ञान होता. राष्ट्रपति ने कहा कि तब हम भी फॉरेस्ट प्रोड्यूस कलेक्ट करते थे. लेकिन उसका मूल्यवर्धन कैसे होगा. इसकी थोड़ी भी जानकारी नहीं थी. आज सरकार द्वारा भी महिला समूहों की मदद की जा रही है और महिला समूह सशक्त हो रही है.
उन्होंने कहा कि महिला समूह की सदस्यों के चेहरे पर खुशी देखकर बेहद खुशी हो रही है. राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार सौ कदम बढ़ाएगी तो आपको भी दस कदम बढ़ाना होगा.
जनजातीय परिवार में जन्म लेना गर्व की बात
राष्ट्रपति ने कहा कि झारखंड की महिलाओं में अदम्य शक्ति है. वह पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चलती है. सामाजिक व आर्थिक विकास में योगदान देती है. उन्होंने कहा कि उन्हें जनजातीय परिवार में जन्म लेने पर गर्व है. आदिवासी समाज में कई परंपराएं हैं. जो किसी और समाज में नहीं है. हम बिना दहेज के बहू लाते हैं. बिना दहेज के बेटी देते हैं.
अन्य समाज को इसका अनुकरण करना चाहिए. राज्य में 26 फीसदी आबादी यानी 1 करोड़ से अधिक आदिवासी हैं. इनमें आधी महिलाएं हैं. झारखंड की महिलाएं सशक्त व आत्मनिर्भर है.
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने विभिन्न क्षेत्रों में पद्म पुरस्कार प्राप्त करने वाली झारखंड की जमुना टुडू, छुटनी महतो, दीपिका कुमारी के अलावा महिला खिलाड़ियों ब्यूटी डुंगडुंग, प्रमोदिनी लकड़ा, सलीमा टेटे व दीपिका सेरेंग की उपलब्धियों की तारीफ की.
एसएचजी ने महिलाओं को बनाया मजबूत-राज्यपाल
कार्यक्रम में राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि राज्यपाल बनने के बाद मुझे भी बिरसा की धरती आने का मौका मिला. मैं उलिहातू आया. उनके परिजनों से मिला. उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा ने जनजातीय संस्कृति की रक्षा की.
लोगों ने उन्हें भगवान माना. उन्होंने भारत में आने वाली पीढ़ी को नयी दिशा प्रदान की. भगवान बिरसा मुंडा दूरदर्शी स्वतंत्रता सेनानी थे. उनका किया काम समाज के लिए प्रेरणा स्रोत बना रहेगा. उन्होंने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में सेल्फ हेल्फ ग्रुप काम कर रहा है और बड़ी संख्या में इससे महिलाएं जुड़ी हुई है. एसएचजी ने महिलाओं को मजबूत बनाया है.
सरना धर्म कोड लागू करायें तथा हो, मुंडारी व कुडूख को संविधान की आठवीं अनुसूची में करायें शामिल-मुख्यमंत्री
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य में आदिवासियों के अस्तित्व को बचाने के लिए उनकी कुछ मांगों को पूरा करने की जरूरत है.
उन्होंने राष्ट्रपति से सरना धर्म कोड लागू करने तथा हो, मुंडारी व कुडूख को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग की. इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के आदिवासी जल, जंगल और जमीन की पहचान के लिए लड़ते हैं. यहां के खनिज संपदा से पूरा देश रोशन हो रहा है. आदिवासी विस्थापन का दर्द झेल रहे हैं.
कार्यक्रम में अतिथि बन कर जाते हैं, तो अधिकारी स्टॉल लगा कर बस तरक्की दिखा देते हैं. लेकिन वस्तुस्थिति कुछ और ही है. अधिकारी सिर्फ झांकी दिखाते हैं. लेकिन हम इस झांकी के पीछे देखने की कोशिश करते हैं.
वहीं मुख्यमंत्री ने अर्जुन मुण्डा की तारीफ की. उन्होंने कहा कि हमारे राज्य के अर्जुन मुंडा के भारत सरकार के जनजातीय मंत्रालय में आने के बाद ट्राइफेड में सुधार दिखा है. जब तक यह मंत्री रहेंगे. तब तक झारखंड को लाभ मिलेगा. राज्य में 225 एसएचजी काम कर रहे हैं. राज्य में 14 हजार से अधिक गांव वनोपज से सीधा जुड़ा हुआ है.
लेकिन इन वनोपाज की सही कीमत नहीं मिल रही है. बिचौलिया हावी है. लैम्पस-पैक्स कागजों पर काम कर रहा है.
कार्यक्रम में थे शामिल
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने स्वयं सहायता समूह की दीदियों द्वारा लगाए गए स्टॉल्स का भ्रमण किया और उनके साथ सीधा संवाद किया. सम्मेलन में केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा, विभाग के राज्यमंत्री रेणुका सिंह सरूता, झारखंड सरकार में मंत्री जोबा मांझी समेत विधायक कोचे मुंडा, नीलकंठ सिंह मुंडा व विकास सिंह मुंडा एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कड़िया मुंडा के अलावा कई गणमान्य उपस्थित थे.

