
उदित वाणी, जमशेदपुर: जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अमर सिंह पर लगाए गए आरोपों की जांच रिपोर्ट कुलपति कार्यालय भेज दी गई है. इसके साथ ही इसकी प्रति राजभवन को भी सुपुर्द कर दी गई है.
इस बीच इधर, जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अमर सिंह के खिलाफ एक बार फिर छात्र संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है. प्राचार्य पर लगे कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर छात्र नेता मंगलवार को राजभवन पहुंच गए.
राजभवन में कोल्हान छात्र संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधि राज्यपाल के प्रधान सचिव डॉ. नितिन मदन कुलकर्णी से मिले और उन्हें प्राचार्य डॉ. अमर सिंह पर लगाए गए आरोपों के कथित तथ्यों से अवगत कराया और को-ऑपरेटिव कॉलेज के प्राचार्य की शिकायत की.
राज्यपाल के प्रधान सचिव को छात्रों ने प्राचार्य के खिलाफ कुछ सबूत भी सौंपे हैं. छात्रों ने बताया कि प्राचार्य द्वारा कथित तौर पर किए गये वित्तीय अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार के निमित्त तमाम सबूत राजभवन को सौंप दिए गए हैं. इसके साथ एक ज्ञापन भी सौंपा गया.
राज्यपाल के सचिव को छात्रों ने बताया कि लंबे समय से इस अनियमितता की शिकायत विश्वविद्यालय व कुलपति प्रो. गंगाधर पंडा से की जा रही है, लेकिन इसमें किसी तरह की ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है.
छात्रों ने राज्यपाल के सचिव को बताया कि कोल्हान विश्वविद्यालय पिछले कुछ समय से भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है. राजभवन में राज्यपाल के प्रधान सचिव डॉ. नितिन मदन कुलकर्णी से मिल कोल्हान छात्र संघर्ष मोर्चा के सोनू ठाकुर और दीपक पांडेय ने उन्हें बेंच-डेस्क घोटाला समेत कॉलेज में चल रहे कथित सभी मामलों से अवगत कराते हुए कहा कि पिछले कई महीनो से प्राचार्य के खिलाफ आंदोलन हो रहा है, जिसे देखते हुए आनन-फानन में विश्वविद्यालय द्वारा जांच टीम भी गठित की गई पर वो भी जांच सिर्फ खानापूर्ति के लिए की गई है और जांच कराकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है.
राज्यपाल के प्रधान सचिव से को-ऑपरेटिव के प्रिंसिपल के मामले में उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई और राज्यपाल के नाम एक मांगपत्र सौंपा गया. राजभवन पहुंचे छात्र नेताओं के प्रतिनिधिमंडल में सोनू ठाकुर, दीपक पांडेय, बीरेंद्र कुमार, अजय होनहागा, अभिषेक झा शामिल थे.
को-ऑपरेटिव के प्राचार्य की जांच रिपोर्ट लिफाफे में बंद
को-ऑपरेटिव कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अमर सिंह पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच पिछले दिनों विश्वविद्यालय की ओर से गठित टीम द्वारा की गई थी. दरअसल, विश्वविद्यालय प्रशासन ने को-ऑपरेटिव कॉलेज के प्राचार्य पर अलग-अलग छात्र संगठनों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया था.
इस जांच कमेटी का चेयरमैन राजेश शुक्ला को बनाया गया था. राजेश शुक्ला ने बताया कि जांच कमेटी ने दोनों पक्षों का बयान रिकार्ड कर जांच रिपोर्ट बनाई थी. रिपोर्ट को राजभवन व विश्वविद्यालय को समर्पित कर दिया गया है.
गौरतलब हो कि प्राचार्य पर नियमों का पालन किए कॉलेज के बेंच डेस्क बेचने का आरोप लगाया गया है तो वहीं आदिवासी छात्रावास के लिए जमीन न देने व जमीन के मामले में घालमेल करने और कॉलेज मैदान अवैध तरीके से दूसरी संस्था को देने समेत कई संगीन आरोप लगाए गए हैं.
चूंकि यह आरोप अलग-अलग छात्र संगठनों द्वारा लगाए गए हैं, इसलिए इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यी कमेटी बनाई गई थी. कमेटी में वर्कर्स कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी महालिक समेत विवि के सीसीडीसी डॉ. मनोज महापात्रा को सदस्य के रूप में शामिल किया गया था.

