
पहले ही ग्रामसभा कर ग्रामीणों ने यूनिवर्सिटी स्थापना के लिए दे दी है सहमति
डांगाटांड़ 20 एकड़ में होगा विवि
उदित वाणी, जमशेदपुर: घाटशिला प्रखंड के डांगाटांड़ गांव स्थित सरकारी जमीन पर पंडित रघुनाथ मुर्मू जनजातीय विश्वविद्यालय का निर्माण किया जाएगा. विद्यालय निर्माण को लेकर भूमि की चयन प्रक्रिया पहले ही पूरी कर ली गई है. यह देश का दूसरा जनजातीय विश्वविद्यालय होगा.
इसके लिए घाटशिला के विधायक रामदास सोरेन ने पहल की थी, जिसे हेमंत सोरेन सरकार ने सहमति दे दी है. क्षेत्र के विकास के लिहाज से यह विश्वविद्यालय काफी सकारात्मक परिणाम लाने वाला होगा.
इसलिए पूर्व में ही स्थानीय विधायक रामदास सोरेन ने विधानसभा में विश्वविद्यालय की स्थापना घाटशिला क्षेत्र में करने को लेकर प्रस्ताव पारित करने हेतु विधानसबा में पूरे दस्तावेज जमा कर दिए थे, साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी पत्राचार किया था.
विश्वविद्यालय निर्माण होने से गांव समेत क्षेत्र में शिक्षा का विस्तार होगा, करीब तीन हजार स्थानीय युवाओं को सीधे तौर पर नौकरी मिलेगी. रोजगार का सृजन होगा. ग्रामीणों ने पिछले दिनों इसे लेकर ग्रामसभा भी की थी, जिसमें विश्वविद्यालय की स्थापना को सहमति प्रदान की गई थी.
बहरहाल, घाटशिला डांगाटांड़ के 36 एकड़ 28 डिसिमिल जमीन में 20 एकड़ जमीन में विश्वविद्यालय निर्माण किया जाएगा. इसका निर्माण कार्य शीघ्र शुरू करने की तैयारी है. इस विश्वविद्यालय की स्थापना होने से ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा का प्रसार प्रचार होगा. ग्रामीण शिक्षित होंगे.
स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछली सरकार में उक्त जमीन पर उद्योग लगाने की कवायद शुरू की गई थी, जिसका विरोध ग्रामीणों ने किया था. यहां अब विद्यालय निर्माण से क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिलेगा, पड़ोसी राज्य के युवा को भी शिक्षा लाभ मिलेगा. विश्वविद्यालय में 9 भाषा का शौध (री-सर्च) किया जाएगा, देश-विदेश में क्षेत्र एवं राज्य को पहचान मिलेगा.
संताल विद्यार्थियों को मिलेगा फायदा
वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक झारखंड में जनजातीय समुदाय की आबादी 26 प्रतिशत से अधिक है. जनजातीय समुदाय की अपनी भाषा-लिपि है. इसमें संताली, खोरठा, कुरमाली आदि प्रसिद्ध हैं.
फिलहाल राज्य के विश्वविद्यालयों में जनजातीय भाषा विभाग कार्यरत हैं. इसके अलावा ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट के माध्यम से जनजातीय समुदाय पर आधारित शोध आदि किए जाते हैं. झारखंड से सटे राज्यों बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश में भी जनाजातीय समुदाय की काफी आबादी है. इसके अलावा बिहार के सीमावर्ती इलाकों में भी आदिवासी समुदाय के लोग निवास करते हैं.
कुलपति से लेकर शिक्षकों तक के चयन को लेकर तय कर दिए गए नियम
जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान और अनुसंधान के विशिष्ट ज्ञान के व्यक्तियों को इस विश्वविद्यालय के विकास में महत्वपूर्ण योगदान करने का मौका मिल सकेगा. इसके साथ ही शोध, अनुसंधान आदि कार्य भी होंगे.
विवि में कुलाधिपति, कुलपति, प्रति कुलपति समेत कुल 13 वर्ग के अधिकारियों के पद सृजित हुए हैं. विधेयक में कुलपति से लेकर शिक्षकों तक के चयन को लेकर नियम तय कर दिए गए हैं.
इस विवि के किसी परिषद, निकाय, प्राधिकरण अथवा समिति में सदस्य के तौर पर किसी व्यक्ति को नामित करने के लिए राज्य सरकार कम से कम तीन नामों की अनुशंसा करेगी, जिनमें एक नाम पर कुलाधिपति अपनी सहमति देंगे. नामों से असहमत होने पर कुलाधिपति लिखित कारण दर्ज कर प्रस्ताव लौटा देंगे.

