
उदित वाणी, रांची : झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन के दो प्रमुख घटक दलों झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है. कांग्रेस की ओर से राज्यसभा की एक सीट के लिए प्रणव झा की उम्मीदवारी की घोषणा किए जाने के करीब 12 घंटे बाद झामुमो विधायकों की बैठक में दोनों सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने पर सहमति बनी है.
पार्टी के विधायकों ने इस मामले में अंतिम निर्णय के लिए मुख्यमंत्री और झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन को अधिकृत किया है. मुख्यमंत्री आवास में शुक्रवार को हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में झामुमो विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई. बैठक के बाद पार्टी नेताओं योगेंद्र प्रसाद और हफीजुल हसन ने मीडिया को बताया कि सभी विधायकों की सर्वसम्मत राय बनी है कि दोनों राज्यसभा सीटों पर झामुमो प्रत्याशी उतारे.
उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों के नामों की घोषणा 8 जून से पहले कर दी जाएगी. झामुमो नेताओं ने कहा कि राज्य में सबसे बड़े राजनीतिक दल होने के नाते दोनों सीटों पर पार्टी का स्वाभाविक दावा बनता है.
झामुमो का यह रुख ऐसे समय सामने आया है, जब कांग्रेस ने गुरुवार देर रात एआईसीसी सचिव और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के राजनीतिक सलाहकार प्रणव झा को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना प्रत्याशी घोषित किया था.
कांग्रेस की घोषणा के बाद यह माना जा रहा था कि गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे पर सहमति बन गई है, लेकिन झामुमो की बैठक के फैसले ने इस धारणा को पलट दिया है. इसके साथ ही गठबंधन के भीतर लंबे समय से चल रही खींचतान और मतभेद अब सार्वजनिक रूप से सामने आ गए हैं. इसके पहले गुरुवार देर रात कांग्रेस ने प्रणव झा को झारखंड से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाने का ऐलान किया था. उम्मीदवार की घोषणा से दो दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बातचीत की थी.
इसके अलावा कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने भी हाल के दिनों में रांची पहुंचकर मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी और राज्यसभा की एक सीट कांग्रेस को देने का आग्रह किया था. इसके बावजूद अब झामुमो द्वारा दोनों सीटों पर दावा ठोक दिए जाने से सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर का मतभेद खुलकर उजागर हो गया है.
झारखंड विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन के पास दोनों सीटें जीतने लायक पर्याप्त संख्या बल है, लेकिन उम्मीदवारों को लेकर पैदा हुआ यह गतिरोध अब गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहा है. कांग्रेस जहां अपने उम्मीदवार की घोषणा के बाद पीछे हटने के संकेत नहीं दे रही, वहीं झामुमो भी दोनों सीटों पर अपनी दावेदारी छोड़ने के मूड में नहीं दिख रहा. नामांकन प्रक्रिया के बीच दोनों सहयोगी दलों के बीच बढ़ी यह खींचतान राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा घटनाक्रम बन गई है और अब निगाहें हेमंत सोरेन तथा कांग्रेस नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हैं.
(आईएएनएस)

