उदित वाणी, रांची : झारखंड में हर ग्रामीण परिवार तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाने की दिशा में मंगलवार को महत्वपूर्ण पहल हुई. नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्र सरकार के ‘जल जीवन मिशन- 2.0’ के तहत झारखंड सरकार और केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए.
इस दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद तथा केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. कार्यक्रम में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े.
इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र से जल जीवन मिशन की लंबित लगभग 6,500 करोड़ रुपये की राशि शीघ्र जारी करने की मांग उठाई. मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2019-20 से अब तक झारखंड में जल जीवन मिशन के तहत 24,635 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न पेयजल योजनाओं पर काम चल रहा है. इनमें मल्टी विलेज और सिंगल विलेज स्कीम शामिल हैं. उन्होंने कहा कि राज्य में अब तक 55 प्रतिशत परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि केंद्र से स्वीकृत अनुदान का केवल 46 प्रतिशत हिस्सा ही प्राप्त हुआ है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान केंद्र की ओर से पर्याप्त राशि जारी नहीं की गई है. उन्होंने लंबित केंद्रांश को शीघ्र जारी करने की मांग करते हुए कहा कि योजनाओं की गति बनाए रखने के लिए वित्तीय सहयोग जरूरी है.
उन्होंने यह भी कहा कि पेयजल परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में विभिन्न केंद्रीय विभागों और संस्थाओं से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मिलने में देरी बाधा बन रही है. राज्य सरकार ने इस प्रक्रिया को तेज करने का आग्रह किया.
मुख्यमंत्री ने राज्य में जल जीवन मिशन के तहत किए गए कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि सिंगल विलेज स्कीम के संचालन के लिए राज्य सरकार ने गांव-गांव में जल सहियाओं की नियुक्ति की है, जिन्हें 2,500 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है. उन्होंने इस व्यवस्था के सतत संचालन के लिए केंद्र से सहयोग देने का अनुरोध किया. साथ ही भविष्य में तैयार होने वाली विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में सभी आवश्यक घटकों को शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया.
राज्य सरकार की मांगों पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने केंद्र सरकार का पक्ष स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि जलापूर्ति योजनाओं के रेट्रोफिटिंग (नवीनीकरण) और नियमित संचालन एवं रखरखाव के लिए केंद्र सरकार अलग से कोई वित्तीय सहायता उपलब्ध नहीं कराएगी. उन्होंने राज्य सरकार को सुझाव दिया कि ऐसे कार्यों के लिए 16वें वित्त आयोग के तहत पंचायती राज संस्थाओं को उपलब्ध कराए गए अनुदान का उपयोग किया जाए. केंद्रीय मंत्री ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और निर्धारित समयसीमा में लक्ष्य हासिल करने पर भी जोर दिया.
(आईएएनएस)


