उदित वाणी,समस्तीपुर: समस्तीपुर के सदर अस्पताल परिसर में उस समय एक हैरान करने वाला और सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया, जब मंडल करा (जेल) में बंद एक विचाराधीन कैदी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। जेल प्रशासन द्वारा उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद जब परिजन अस्पताल पहुँचे, तो वहाँ का माहौल तनावपूर्ण हो गया। परिजनों का कहना है कि जेल पुलिस ने उन्हें सिर्फ तबीयत खराब होने और अस्पताल आने की सूचना दी थी, लेकिन यहाँ पहुँचने पर उन्हें अपने परिजन का शव (लाश) मिला।
परिजनों का आरोप: “ताड़ी-शराब मिली नहीं, जबरन केस दर्ज कर माँगे पैसे”
मृतक के परिजनों ने जेल प्रशासन और पुलिसकर्मियों पर लापरवाही और हत्या के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों के अनुसार, दो दिन पूर्व जिले के हलई थाना क्षेत्र के इंद्रावारा गांव में उत्पाद विभाग की टीम ने छापेमारी की थी। वहां कोई ताड़ी या शराब नहीं मिली थी, लेकिन पुलिस ने जबरन एक बोतल शराब उसके पास रखकर, मेडिकल जांच के बाद उसे जेल भेज दिया। परिजनों का यह भी आरोप है कि उत्पाद विभाग की टीम ने केस में धारा कम करने के नाम पर पैसों की भी डिमांड (मांग) की थी।
“आज होने वाली थी बेल, मारपीट कर मार डाला”
परिजनों ने बताया कि आज ही उस कैदी की जेल से बेल (जमानत) होने वाली थी और परिवार के कुछ लोग उससे मिलने भी जाने वाले थे। इसी बीच अचानक उसकी मौत की खबर आई। परिजनों ने जेल प्रशासन, जेल के डॉक्टर और सदर अस्पताल के डॉक्टरों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जेल में उसके साथ मारपीट की गई थी। इस सच्चाई को छुपाने के लिए प्रशासन उसे इलाज के बहाने सदर अस्पताल लाया था।
अस्पताल परिसर बना पुलिस छावनी, मरीजों में मची अफरा-तफरी
कैदी की मौत से आक्रोशित परिजनों ने सदर अस्पताल परिसर में देर रात तक जमकर हंगामा किया और हाई वोल्टेज ड्रामा चलता रहा। इस हंगामे के कारण वार्ड में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों में अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया और लोग अपनी जान बचाकर इधर-उधर भागने लगे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए नगर थाने की पुलिस के साथ-साथ कई अन्य थानों की पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया। पूरा अस्पताल परिसर पुलिस छावनी में तब्दील हो गया।
पोस्टमार्टम रोकने पर अड़े परिजन, डीएम-एसपी को बुलाने की मांग
पुलिस ने शव को जब्त कर पोस्टमार्टम कराने का भरपूर प्रयास किया, लेकिन परिजन मौत का सही कारण स्पष्ट होने और कार्रवाई होने तक अड़े रहे। परिजनों ने मांग की है कि जिला के डीएम (DM), एसपी (SP) और वरीय पदाधिकारी मौके पर आएं और एक जांच कमेटी बनाकर अभिलंब कार्रवाई करें। इसके अलावा, परिजनों ने स्थानीय मोरवा विधायक रणविजय साहू, स्थानीय गांव के पंचायत के मुखिया और सरपंच को भी मौके पर बुलाकर प्रशासन के समक्ष पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। परिजनों ने चेतावनी दी है कि यदि न्याय नहीं मिला तो वे सड़क जाम कर प्रशासन के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करेंगे।


