उदित वाणी, रांची : क्लस्टरिंग और रीस्ट्रक्चरिंग सिस्टम के विरोध में आजसू ने रांची विश्वविद्यालय गेट से अल्बर्ट एक्का चौक तक एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान कार्यकर्ताओं ने माननीय मुख्यमंत्री महोदय एवं राज्य सरकार का पुतला दहन किया.
पुतला दहन के दौरान आजसू छात्र संघ के प्रदेश वरीय उपाध्यक्ष ऋतुराज शाहदेव ने कहा कि यदि सरकार इस फैसले को वापस नहीं लेती है, तो विश्वविद्यालयों में अनिश्चितकालीन तालाबंदी की जाएगी.
सरकार के संकल्प पत्र को आजसू ने बताया जनविरोधी
ऋतुराज शाहदेव ने कहा कि झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा जारी संकल्प पत्रांक–05/प0-13/2023 – 902, संकल्प पत्रांक–05/प0-06/2023 – 893 एवं अन्य संकल्प पत्रों के माध्यम से राँची विश्वविद्यालय तथा इसके अंतर्गत संचालित अंगीभूत महाविद्यालयों और झारखण्ड के अन्य विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों के “Restructuring” तथा “Clustering System” को लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है.
यह प्रस्ताव राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था, विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों तथा झारखंड की भाषाई एवं सांस्कृतिक अस्मिता के लिए अत्यंत चिंताजनक, अव्यावहारिक एवं जनविरोधी प्रतीत होता है. अतः आजसू इस संपूर्ण व्यवस्था का पुरज़ोर विरोध करते हुए इसे तत्काल निरस्त करने की मांग करती हैं.
उन्होंने कहा कि झारखंड के अधिकांश विद्यार्थी ग्रामीण, आदिवासी, दलित, पिछड़े एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं, जो सीमित संसाधनों में निकटवर्ती महाविद्यालयों में पढ़ते हैं. वर्तमान व्यवस्था में एक ही कॉलेज में कला, विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय उपलब्ध रहने से उन्हें विषय चयन की स्वतंत्रता मिलती है, लेकिन प्रस्तावित व्यवस्था इसे समाप्त कर देगी.
गरीब, ग्रामीण और छात्राओं की शिक्षा पर पड़ेगा गंभीर असर: राजेश सिंह और सक्षम झा
प्रदेश सचिव राजेश सिंह ने कहा कि इस व्यवस्था के कारण गरीब एवं ग्रामीण विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा. उन्हें परिवहन, आवास एवं अन्य खर्च वहन करने पड़ेंगे, जिससे बड़ी संख्या में विद्यार्थी उच्च शिक्षा छोड़ने को विवश होंगे. वहीं, प्रदेश सचिव सक्षम झा ने कहा कि ग्रामीण परिवारों की अनेक छात्राएँ केवल निकटवर्ती महाविद्यालयों में ही अध्ययन कर पाती हैं.
यदि उन्हें दूरस्थ महाविद्यालयों में जाना पड़ा, तो उनकी शिक्षा बाधित होगी तथा महिला शिक्षा को गंभीर क्षति पहुँचेगी. उन्होंने इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) की मूल भावना के विपरीत बताया, जो बहुविषयी (Multidisciplinary) शिक्षा को बढ़ावा देती है.
ऐतिहासिक पहचान और नौकरियों पर संकट: अमन साहू
महानगर अध्यक्ष अमन साहू ने कहा कि महाविद्यालयों की ऐतिहासिक पहचान समाप्त होने का खतरा है. यदि विभिन्न संकाय समाप्त या स्थानांतरित कर दिए गए, तो उनकी गरिमा प्रभावित होगी. इसके साथ ही, इस संकल्प में अनेक शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों को “Surrender” करने तथा पुनर्गठन के नाम पर समाप्त करने का प्रस्ताव है, जबकि पहले से ही शिक्षकों एवं कर्मचारियों की भारी कमी है. पदों की कटौती से शिक्षा की गुणवत्ता, शोध कार्य, परीक्षा व्यवस्था, पुस्तकालय और प्रशासनिक कार्य गंभीर रूप से प्रभावित होंगे.
जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं पर सीधा खतरा
आजसू नेताओं ने कहा कि वर्तमान में विश्वविद्यालयों में संताली, हो, खड़िया, कुड़ुख, मुंडारी, नागपुरी, पंचपरगनिया, खोरठा एवं कुड़माली जैसी भाषाओं का अध्यापन होने से नई पीढ़ी अपनी संस्कृति से जुड़ी है. किन्तु प्रस्तावित “Clustering System” के तहत इन विभागों को सीमित अथवा स्थानांतरित किए जाने से ये विभाग स्वतः कमजोर हो जाएंगे. विद्यार्थी दूर जाकर इन भाषाओं का अध्ययन नहीं कर पाएंगे, जिससे नामांकन घटेगा और ये भाषाएं उच्च शिक्षा से समाप्त होने लगेंगी. यह झारखंड की सांस्कृतिक पहचान और भाषाई विरासत पर गंभीर आघात होगा.
आजसू छात्र संघ की मुख्य मांगें:
“Restructuring एवं Clustering System” संबंधी उक्त संकल्प को तत्काल निरस्त किया जाए.
प्रत्येक महाविद्यालय में पूर्ववत कला, विज्ञान एवं वाणिज्य संकायों को यथावत रखा जाए.
जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के विभागों एवं अध्ययन-अध्यापन की वर्तमान व्यवस्था को सुरक्षित रखा जाए.
शिक्षकों एवं कर्मचारियों के पदों में कटौती बंद कर नियमित नियुक्तियाँ की जाएँ.
किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पूर्व विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों एवं शिक्षाविदों से व्यापक विमर्श किया जाए.
कार्यक्रम में उपस्थित सदस्य
आज के विरोध कार्यक्रम में मुख्य रूप से अमित यादव, प्रताप सिंह, सौरभ यादव, अंकित कुमार, अब्दुल ख़ान, रवि रौशन, अनुका, रिशव, कृष, डॉ सौरभ शर्मा, आदित्य, खुसभु, गौरभ सिंह इत्यादि लोग मुख्य रूप से उपस्थित थे.


