उदित वाणी, रांची : झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य के पुलिस थानों में CCTV कैमरा इंस्टॉलेशन की निविदा (Tender) प्रक्रिया में भारी भ्रष्टाचार की आशंका जताई है. मुख्यमंत्री को लिखे एक कड़े पत्र में मरांडी ने आरोप लगाया है कि इस योजना में शराब घोटाले की तर्ज पर किसी खास ‘सिंडिकेट’ को लाभ पहुँचाने के लिए नियम बदले गए हैं. उन्होंने सीएम को आगाह करते हुए कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो इस घोटाले की लपटें सीधे मुख्यमंत्री तक पहुँच सकती हैं.
टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी के गंभीर आरोप
बाबूलाल मरांडी ने पत्र में विस्तार से बताया कि पिछली निविदा को बिना किसी ठोस कारण के निरस्त कर नई निविदा निकाली गई है. उन्होंने सूचना तकनीकी विभाग और JAPIT के बीच हुए पत्राचार का हवाला देते हुए कहा कि संयुक्त सचिव के उत्तर स्वयं इस विषय को संदिग्ध बनाते हैं. मरांडी ने आरोप लगाया कि टाटा एडवांस सिस्टम और कुछ चुनिंदा सिंडिकेट के लोगों को फायदा पहुँचाने के लिए टेंडर के तकनीकी मापदंडों (Specifications) के साथ छेड़छाड़ की गई है.
मरांडी द्वारा उठाए गए 7 मुख्य तकनीकी बिंदु
मरांडी ने पत्र में टेंडर के तकनीकी पहलुओं पर सवाल उठाते हुए निम्नलिखित बिंदु गिनाए हैं:
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन: मांगे गए कैमरे 2MP के हैं, जबकि रिकॉर्डिंग 1MP के रेजोल्यूशन पर 12 महीने के लिए मांगी गई है.
पात्रता मापदंडों में हेरफेर: विकेंद्रीकृत सीसीटीवी स्थापना के टेंडर में कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का अनुभव मांगा गया है, जो चुनिंदा बोलीदाताओं के लिए है.
OEM के लिए कठिन शर्तें: कैमरे के लिए केवल 5 वर्ष और यूपीएस के लिए 10 वर्ष का अनुभव मांगकर विशिष्ट कंपनियों को फायदा पहुँचाने की कोशिश की गई है.
चीन से संबंध: साइबर सुरक्षा नियमों के बावजूद चीनी JV कंपनी में समान निदेशक वाले OEM को भी योग्य माना गया है.
विशिष्ट प्रमाणन: स्विच और अन्य उपकरणों के लिए कठिन टेस्ट रिपोर्ट्स मांगी गई हैं, जबकि कैमरों के लिए केवल डिक्लेरेशन स्वीकार किया गया है.
कर्मचारियों को धमकी और जबरन फाइल बढ़ाने का दावा
मरांडी ने यह भी दावा किया कि विभाग में संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की धमकी दी जा रही है. उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का सेवा विस्तार केवल छह महीने का किया गया है ताकि वे विरोध न कर सकें. उन्होंने सीएम से मांग की है कि इस निविदा को तुरंत रद्द किया जाए और गड़बड़ी में शामिल अधिकारियों पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाए.


