उदित वाणी, रांची: केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के विरुद्ध कांग्रेस, झामुमो और अन्य विपक्षी दलों के कथित नकारात्मक रुख के खिलाफ शनिवार को प्रदेश भाजपा ने राजधानी में शक्ति प्रदर्शन किया. रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित इस विशाल ‘महिला आक्रोश मार्च’ में हजारों की संख्या में महिलाओं और भाजपा कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विपक्षी दल महिलाओं के आरक्षण और उनके अधिकारों पर कुठाराघात कर रहे हैं, जिसका जवाब अब राज्य की मातृशक्ति सड़क पर उतरकर दे रही है.
दिग्गज नेताओं के नेतृत्व में गूँजा ‘जन आक्रोश’
इस भव्य जन आक्रोश रैली और पदयात्रा का नेतृत्व केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, केंद्रीय राज्य मंत्री संजय सेठ, और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास व अर्जुन मुंडा ने किया. रैली में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, जमशेदपुर के जिला अध्यक्ष संजीव सिंह, पूर्व सांसद गीता कोड़ा और भाजपा नेत्री मीरा मुंडा भी प्रमुख रूप से शामिल हुईं.
नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को सशक्त बनाने का एक ऐतिहासिक कदम है, लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इसे पचा नहीं पा रहे हैं और लगातार महिलाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं.
जमशेदपुर से उमड़ा कार्यकर्ताओं का सैलाब
जमशेदपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों से भी भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की भारी भागीदारी रही. जिला भाजपा नेता सुबोध झा, शैलेश पाठक, युवा मोर्चा महामंत्री मनोज सिंह, मंडल अध्यक्ष सोनी तिवारी, मनोज कुमार, संतोष सिंह, जूली शर्मा, सीमा देवी, बबीता देवी और कुसुम पूर्ति के नेतृत्व में हजारों की संख्या में मातृशक्ति और कार्यकर्ता रांची पहुँचे. सभी मंडलों और मोर्चों के अध्यक्षों ने इस पदयात्रा में शामिल होकर नारी शक्ति के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की.
अधिकारों के प्रति सजग हुई मातृशक्ति
रैली के दौरान वक्ताओं ने कहा कि आज बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति इस बात का जीवंत प्रमाण है कि वे अपने अधिकारों और सम्मान के प्रति पूरी तरह सजग हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि झारखंड की महिलाएं कांग्रेस और उसके सहयोगियों की “महिला विरोधी” राजनीति का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देने के लिए प्रतिबद्ध हैं. पदयात्रा के दौरान ‘नारी शक्ति जिंदाबाद’ और ‘आरक्षण विरोधी विपक्ष मुर्दाबाद’ के नारों से पूरा मोरहाबादी क्षेत्र गुंजायमान रहा.


