
उदित वाणी, जमशेदपुर: हो भाषा एवं साहित्य की वर्तमान दशा और दिशा को लेकर आज सर्किट हाउस स्थित सभागार में हो समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। श्रीमती बहालेन चंपिया की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में हो भाषा के गिरते स्तर और साहित्य की बदहाली पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। समाज ने एक स्वर में झारखंड सरकार से ‘हो भाषा साहित्य अकादमी’ के अविलंब गठन की मांग की है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि कोल्हान क्षेत्र के सभी वर्तमान विधायकों के साथ समाज का एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन से मुलाकात करेगा। इस दौरान अकादमी के गठन हेतु ज्ञापन सौंपा जाएगा। समाज ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अकादमी का गठन जल्द नहीं हुआ, तो जोरदार आंदोलन छेड़ा जाएगा।
समाज ने राज्य सरकार से मांग की है कि विश्वविद्यालयों में हो भाषा के पाठ्यक्रमों और आवश्यकता आधारित पाठ्यपुस्तकों के निर्माण की दिशा में तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जाए। इसके लिए भी सरकार को अलग से ज्ञापन सौंपा जाएगा।
हो भाषा साहित्य के विकास के लिए बैठक में कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए:
लाको बोदरा पुरस्कार: झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम के हो साहित्यकारों की प्रकाशित सामग्री के मूल्यांकन हेतु इस पुरस्कार की घोषणा की गई है।
साहित्यिक मंच: सभी राज्यों के साहित्यकारों को एक मंच पर लाने के लिए ‘आल इंडिया हो लिटरेचर फोरम’ का गठन किया गया है। यह फोरम राष्ट्रीय स्तर पर हो भाषाई रचनाओं के संग्रह और प्रकाशन का कार्य करेगा।
नियमित समीक्षा: साहित्यकारों ने निर्णय लिया है कि वे महीने में एक दिन हो साहित्य के मूल्यांकन और विकास के लिए समर्पित करेंगे।
ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड में सशक्त साहित्यिक संगठन गठित करने का निर्णय लेते हुए प्रस्तावित नामों पर सहमति दी गई। बैठक का संचालन डेमका सोय ने किया। इस दौरान विभिन्न राज्यों के हो साहित्यकारों को एकजुट कर भाषा की अस्मिता बचाने का संकल्प लिया गया।

