
उदित वाणी, जमशेदपुर : विधायक सरयू राय के विरोध और धरना-प्रदर्शन के बावजूद रेलवे की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं दिख रहा है। शुक्रवार को भी ट्रेनों की लेटलतीफी का सिलसिला जारी रहा, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पुणे से हावड़ा जाने वाली 12129 आजाद हिंद एक्सप्रेस करीब छह घंटे की देरी से चली, जबकि कुल 18 ट्रेनें विभिन्न समय अंतराल से लेट रहीं।
टाटानगर स्टेशन से होकर गुजरने वाली लगभग एक दर्जन ट्रेनों ने निर्धारित समय से काफी देर से पहुंचकर यात्रियों की धैर्य की परीक्षा ली। योग नगरी ऋषिकेश से पुरी जाने वाली 18478 कलिंग उत्कल एक्सप्रेस तीन घंटे 49 मिनट की देरी से रात 9:34 बजे टाटानगर पहुंची। वहीं दुर्ग से आरा जाने वाली दक्षिण बिहार एक्सप्रेस लगभग चार घंटे लेट रही।
रेलवे की इस अव्यवस्था का असर दैनिक यात्रियों से लेकर लंबी दूरी तय करने वाले लोगों पर साफ देखा गया। खड़गपुर मेमू एक घंटे 10 मिनट, स्टील एक्सप्रेस दो घंटे 43 मिनट, और गुआ-टाटा मेमू दो घंटे 21 मिनट की देरी से चली। इतवारी-टाटा एक्सप्रेस भी करीब तीन घंटे देर से पहुंची।
विशेष ट्रेनों की स्थिति भी बेहतर नहीं रही। लातूर समर स्पेशल एक्सप्रेस सबसे अधिक छह घंटे 15 मिनट विलंबित रही, जबकि इतवारी स्पेशल फेयर एक्सप्रेस तीन घंटे 27 मिनट लेट रही। शालीमार-पोरबंदर एक्सप्रेस और मुंबई मेल भी क्रमशः डेढ़ से चार घंटे तक देरी से चलीं।
इसके अलावा क्रिया योग एक्सप्रेस, समलेश्वरी एक्सप्रेस, टाटानगर एक्सप्रेस और पटना साप्ताहिक सुपरफास्ट जैसी महत्वपूर्ण गाड़ियां भी दो से चार घंटे तक लेट रहीं। लगातार हो रही देरी से यात्रियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
यात्रियों का कहना है कि विरोध-प्रदर्शन के बावजूद अगर रेलवे प्रशासन की नींद नहीं खुलती, तो आगे और बड़े आंदोलन की जरूरत पड़ सकती है। फिलहाल, रेलवे की लचर व्यवस्था से आम लोगों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
