
उदित वाणी, चांडिल: ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के नीमडीह प्रखण्ड अंतर्गत बामणी इलाके में विकास योजनाओं के शिलान्यास को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. यहाँ सड़क निर्माण योजना के शिलान्यास से ठीक पहले शिलापट से जिला परिषद सदस्य असित सिंह पातर का नाम मिटाए जाने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई है. इस घटना के बाद ग्रामीण कार्य विभाग की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
करोड़ों की लागत से बननी हैं दो सड़कें
करीब 3.89 करोड़ रुपये की लागत से माझीडीह मोड़ से माकुला भाया बानडीह तथा भांगाट से रांकाड तक दो महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं का निर्माण होना है. शिलान्यास के लिए तैयार किए गए शिलापट पर पहले केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, स्थानीय विधायक सविता महतो, जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा और जिला परिषद सदस्य असित सिंह पातर का नाम अंकित था.
नाम मिटाने पर ग्रामीणों का आक्रोश
कार्यक्रम शुरू होने से ठीक पहले असित सिंह पातर का नाम अचानक हटा दिया गया. इससे भांगाट निवासी निर्मल सिंह और सुधाकर सिंह समेत दर्जनों ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया. ग्रामीणों ने इसे जनप्रतिनिधि का सीधा अपमान करार दिया है. उनका सवाल है कि जब नाम पहले से अंकित था, तो उसे ऐन वक्त पर किसके आदेश पर हटाया गया? ग्रामीणों के अनुसार, संबंधित अधिकारियों से पूछने पर उन्होंने “प्रोटोकॉल” का हवाला दिया, लेकिन कोई ठोस स्पष्टीकरण नहीं दे सके.
असित सिंह पातर ने इसे बताया लोकतंत्र का हनन
जिला परिषद सदस्य असित सिंह पातर ने इस घटना को राजनीतिक दबाव में की गई कार्रवाई बताया है. उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र का हनन है और वह इस मामले को शांत नहीं होने देंगे. पातर ने चेतावनी दी है कि इस विषय को उपायुक्त, जिला परिषद की बैठक, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया जाएगा. इसके साथ ही उन्होंने शिलापट पर मजदूरी दर और कार्य पूरा होने की समय-सीमा का उल्लेख नहीं होने पर भी तकनीकी खामियों की ओर इशारा किया है.
विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
इस पूरे प्रकरण में ग्रामीण कार्य विभाग के कनीय अभियंता द्वारा कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिए जाने से विभाग की कार्यशैली सवालों के घेरे में है. बिना किसी आधिकारिक आदेश या ठोस कारण के शिलापट में बदलाव किए जाने से क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है और ग्रामीण विभाग के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं.

